श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 3 (श्लोक 31-43): काम रूपी शत्रु का नाश और स्वधर्म की श्रेष्ठता अध्यात्म कर्मयोग (Karma Yoga) भगवद्गीता (Bhagavad Gita) श्रीकृष्ण-संवाद +
भगवद्गीता अध्याय 3 (21-30): श्रेष्ठ पुरुष का आचरण और अहंकार का त्याग अहंकार-त्याग कर्मयोग नेतृत्व लोकसंग्रह श्रीकृष्ण-उपदेश श्रेष्ठ-पुरुष +
भगवद्गीता अध्याय 3 (11-20): सृष्टि चक्र, लोकसंग्रह और निःकाम कर्मयोग कर्मयोग गीता-ज्ञान निष्काम-कर्म लोकसंग्रह श्रीकृष्ण-वाणी सृष्टि-चक्र +
भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 1-10: कर्मयोग का रहस्य और मिथ्याचार का खंडन कर्मयोग निष्काम-कर्म भगवद्गीता-अध्याय-3 यज्ञ-सिद्धांत श्रीकृष्ण-उपदेश +
भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 51-60: स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण और आत्म-संतुष्टि अर्जुन-प्रश्न भगवद्गीता-व्याख्या श्रीकृष्ण-उपदेश सांख्ययोग स्थितप्रज्ञ +
भगवद्गीता अध्याय 2 (61-72): पतन की सीढ़ी और स्थितप्रज्ञ की ब्राह्मी स्थिति बुद्धिनाश ब्राह्मी-स्थिति शांति-का-मार्ग सांख्ययोग स्थितप्रज्ञ +
भगवद्गीता अध्याय 2 (41-50): कर्मण्यवाधिकारस्ते—कर्म और योग का अद्भुत विज्ञान कर्मयोग निष्काम-कर्म भगवद्गीता योगः-कर्मसु-कौशलम् श्रीकृष्ण सफलता-का-मंत्र +