- श्रीकृष्ण: भगवान विष्णु के पूर्ण अवतार और पांडवों के मार्गदर्शक; जिन्होंने कुरुक्षेत्र की रणभूमि में गीता का दिव्य ज्ञान दिया।
भीष्म पितामह: राजा शांतनु और गंगा के पुत्र; जिन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य और हस्तिनापुर के सिंहासन की रक्षा की भीषण प्रतिज्ञा ली थी।
युधिष्ठिर: सबसे बड़े पांडव जो धर्मराज के अंश से उत्पन्न हुए थे; अपनी सत्यवादिता, धैर्य और न्यायप्रियता के लिए पूरे विश्व में विख्यात थे।
भीम: पवनपुत्र और कुंती के द्वितीय पुत्र; जिनके पास दस हजार हाथियों का बल था और जिन्होंने अकेले ही सौ कौरवों का अंत किया।
अर्जुन: इंद्रदेव के अंश और कुंती के पुत्र; वे विश्व के सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर और भगवान श्रीकृष्ण के सबसे प्रिय मित्र थे।
नकुल: माद्री के पुत्र और अश्विनी कुमारों के अंश; वे तलवारबाजी के अद्वितीय योद्धा और अत्यंत आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी थे।
सहदेव: माद्री के पुत्र और सबसे छोटे पांडव; वे महान त्रिकालदर्शी ज्योतिषी थे जिन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं का पहले से ज्ञान था।
द्रौपदी: पांचाल नरेश द्रुपद की पुत्री जो यज्ञकुंड से प्रकट हुई थी; वे पाँचों पांडवों की धर्मपत्नी और आत्मसम्मान की प्रतिमूर्ति थीं।
कर्ण: कुंती और सूर्यदेव के पुत्र जो सूत पुत्र के रूप में पले; वे अपनी दानवीरता और अर्जुन के सबसे प्रबल प्रतिद्वंद्वी के रूप में जाने जाते हैं।
दुर्योधन: धृतराष्ट्र और गांधारी का ज्येष्ठ पुत्र; जिसकी ईर्ष्या, हठ और अधर्म के कारण ही महाभारत का विनाशकारी युद्ध हुआ।
धृतराष्ट्र: हस्तिनापुर के जन्मांध राजा; जिनका अपने पुत्रों के प्रति अत्यधिक मोह ही कुरु वंश के विनाश का मुख्य कारण बना।
गांधारी: गंधार की राजकुमारी और धृतराष्ट्र की पत्नी; जिन्होंने पति के सम्मान में अपनी आँखों पर जीवनभर के लिए पट्टी बाँध ली थी।
कुंती: पांडवों की माता और वासुदेव की बहन; जिन्होंने अपने जीवन के कठिन संघर्षों के बावजूद धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ा।
विदुर: यमराज के अवतार और हस्तिनापुर के महामंत्री; जो अपनी निष्पक्षता, बुद्धिमानी और 'विदुर नीति' के लिए प्रसिद्ध थे।
द्रोणाचार्य: कौरवों और पांडवों के शस्त्र गुरु; जो धनुर्विद्या के महान आचार्य थे और कुरुक्षेत्र युद्ध में कौरवों के सेनापति रहे।
शकुनि: गांधारी का भाई और दुर्योधन का मामा; जिसकी कुटिल चालों और छल-कपट ने पांडवों को वनवास और युद्ध की ओर धकेला।
अश्वत्थामा: गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र जिन्हें भगवान शिव का अंश माना जाता है; जिन्हें उनकी क्रूरता के कारण कलयुग के अंत तक जीवित रहने का श्राप मिला।
कृपाचार्य: हस्तिनापुर के कुलगुरु और चिरंजीवी पुरुष; जिन्होंने कौरव और पांडव राजकुमारों को प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार दिए थे।
अभिमन्यु: अर्जुन और सुभद्रा के वीर पुत्र; जिन्होंने मात्र 16 वर्ष की आयु में चक्रव्यूह भेदकर अपनी वीरता से सबको चकित कर दिया था।
सुभद्रा: श्रीकृष्ण की बहन और अर्जुन की पत्नी; जिनसे पांडव वंश के एकमात्र जीवित उत्तराधिकारी अभिमन्यु का जन्म हुआ।
शांतनु: हस्तिनापुर के महान राजा और भीष्म के पिता; जिनका विवाह देवी गंगा और बाद में निषाद कन्या सत्यवती से हुआ था।
गंगा: स्वर्ग की पवित्र नदी और शांतनु की प्रथम पत्नी; जिन्होंने भीष्म जैसे प्रतापी पुत्र को जन्म देकर उन्हें समस्त विद्याओं में निपुण किया।
सत्यवती: राजा शांतनु की द्वितीय पत्नी; जिनके कारण भीष्म को अपनी भीषण प्रतिज्ञा लेनी पड़ी ताकि सत्यवती की संतान राजा बन सके।
महर्षि वेदव्यास: सत्यवती के पुत्र और महाभारत ग्रंथ के रचयिता; जिन्होंने अपनी योगशक्ति से धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर को जन्म दिया।
पांडु: धृतराष्ट्र के छोटे भाई और पांडवों के पिता; जो एक ऋषि के श्राप के कारण अपना राज्य त्यागकर वन में तपस्या करने चले गए थे।
माद्री: पांडु की दूसरी पत्नी और नकुल-सहदेव की माता; जिन्होंने पति की मृत्यु के समय स्वयं को उनके साथ सती कर लिया था।
दुःशासन: धृतराष्ट्र का दूसरा पुत्र; जिसने भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया था और भीम के हाथों अत्यंत दर्दनाक मृत्यु पाई।
विकर्ण: दुर्योधन का भाई जो न्याय का पक्षधर था; उसने द्रौपदी के चीरहरण के समय कौरवों की सभा में एकमात्र विरोध किया था।
द्रुपद: पांचाल देश के राजा और द्रोणाचार्य के मित्र; जिन्होंने द्रोण से बदला लेने के लिए पुत्र धृष्टद्युम्न और पुत्री द्रौपदी को प्राप्त किया।
धृष्टद्युम्न: राजा द्रुपद के पुत्र और पांडव सेना के मुख्य सेनापति; जिनका जन्म ही गुरु द्रोणाचार्य के वध के उद्देश्य से हुआ था।
शिखंडी: द्रुपद की संतान जो पूर्व जन्म में अंबा थी; जो भीष्म पितामह के पतन और मृत्यु का मुख्य कारण बना।
बलराम: श्रीकृष्ण के बड़े भाई और शेषनाग के अवतार; वे गदा युद्ध के महान प्रशिक्षक थे और युद्ध के दौरान तीर्थयात्रा पर रहे।
बर्बरीक: भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र; जिनके पास तीन बाणों से युद्ध समाप्त करने की शक्ति थी और जिनका शीश कुरुक्षेत्र में आज भी पूजा जाता है।
घटोत्कच: भीम और राक्षसी हिडिम्बा के पुत्र; जिन्होंने युद्ध में अपनी मायावी शक्तियों से कौरव सेना का भारी विनाश किया था।
हिडिम्बा: एक राक्षसी जिसने भीम से विवाह किया; वह एक सती और धर्मपरायण पत्नी के रूप में जानी जाती है।
उत्तरा: राजा विराट की पुत्री और अभिमन्यु की पत्नी; जिनके गर्भ में पल रहे पुत्र परीक्षित ने पांडव वंश को लुप्त होने से बचाया।
विराट: मत्स्य देश के राजा; जिनके महल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कठिन समय भेष बदलकर सुरक्षित बिताया था।
कृतवर्मा: यादव सेना के महारथी जो कौरवों की ओर से लड़े; वे युद्ध के अंत में जीवित बचे गिने-चुने योद्धाओं में से एक थे।
शल्य: मद्र देश के राजा और पांडवों के मामा; जिन्हें दुर्योधन ने छल से अपनी ओर कर लिया और वे युद्ध के अंतिम दिन सेनापति रहे।
जयद्रथ: सिंधु देश का राजा और कौरवों का बहनोई; जो अभिमन्यु के वध में मुख्य रूप से जिम्मेदार था और अर्जुन के हाथों मारा गया।
दुःशला: धृतराष्ट्र की एकमात्र पुत्री और जयद्रथ की पत्नी; जो अपने भाइयों और पति के बीच के संघर्ष में हमेशा दुखी रही।
सात्यकि: अर्जुन का शिष्य और यादवों का वीर योद्धा; जिसने पांडव पक्ष की ओर से लड़ते हुए अनेक कौरव वीरों को पराजित किया।
संजय: धृतराष्ट्र के सारथी जिन्हें दिव्य दृष्टि प्राप्त थी; उन्होंने महल में बैठकर धृतराष्ट्र को महाभारत युद्ध का आँखों देखा हाल सुनाया।
अंबा: काशीराज की पुत्री जो भीष्म से प्रतिशोध लेना चाहती थी; उसने भीष्म के पतन के लिए शिखंडी के रूप में पुनर्जन्म लिया।
अंबिका: विचित्रवीर्य की पत्नी और धृतराष्ट्र की माता; जिनके नेत्र बंद करने के कारण धृतराष्ट्र जन्मांध पैदा हुए।
अंबालिका: विचित्रवीर्य की दूसरी पत्नी और पांडु की माता; जिनके डर से पीला पड़ने के कारण पांडु रोगग्रस्त पैदा हुए।
विचित्रवीर्य: शांतनु और सत्यवती के पुत्र; जिनकी असमय मृत्यु के बाद वंश को बचाने हेतु व्यास जी का सहारा लिया गया।
चित्रांगद: शांतनु के ज्येष्ठ पुत्र; जो अपने नाम के एक गंधर्व के साथ युद्ध करते हुए मारे गए थे।
युयुत्सु: धृतराष्ट्र का पुत्र जो एक दासी से जन्मा था; जिसने धर्म का साथ देते हुए युद्ध में पांडवों के पक्ष से लड़ाई लड़ी।
इरावन: अर्जुन और नागकन्या उलूपी के पुत्र; जिन्होंने पांडवों की विजय के लिए स्वेच्छा से स्वयं की बलि दे दी थी
अक्रूर: श्रीकृष्ण के काका और यादवों के प्रधान; जो अपनी अटूट भक्ति और कृष्ण को मथुरा ले जाने वाले दूत के रूप में प्रसिद्ध हैं।
उग्रसेन: मथुरा के राजा और कंस के पिता; जिन्हें श्रीकृष्ण ने अधर्मी कंस का वध करने के बाद पुनः सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया था।
कंस: उग्रसेन का पुत्र और श्रीकृष्ण का मामा; जो अपनी बहन के आठवें पुत्र के हाथों मृत्यु के भय से ग्रसित एक अत्याचारी शासक था।
जरासंध: मगध का अत्यंत शक्तिशाली राजा और श्रीकृष्ण का कट्टर शत्रु; जिसका वध भीम ने मल्लयुद्ध में शरीर के दो टुकड़े करके किया था।
शिशुपाल: चेदि देश का राजा जिसने राजसूय यज्ञ में भगवान कृष्ण का घोर अपमान किया था; जिसका वध सौ गालियाँ पूरी होने पर सुदर्शन चक्र से हुआ।
दंतवक्र: शिशुपाल का मित्र और एक पराक्रमी राजा; जिसे श्रीकृष्ण ने गदा युद्ध में पराजित कर मोक्ष प्रदान किया था।
पाराशर ऋषि: महर्षि वेदव्यास के पिता और एक महान तपस्वी; जिन्होंने देवी सत्यवती को दिव्य सुगंध और प्रतापी पुत्र का वरदान दिया था।
लोमश ऋषि: पांडवों के वनवास के दौरान उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक; जिन्होंने उन्हें अनेक तीर्थों की यात्रा कराई और दिव्य कथाएँ सुनाईं।
मैत्रेय ऋषि: एक परम ज्ञानी मुनि जिन्होंने दुर्योधन को पांडवों से संधि करने की सीख दी थी और अपमानित होने पर उसे विनाश का श्राप दिया।
दुर्वासा ऋषि: अपनी क्रोधी प्रवृत्ति के लिए विख्यात ऋषि; जिन्होंने कुंती की सेवा से प्रसन्न होकर उन्हें देवताओं का आह्वान करने वाला गुप्त मंत्र दिया था।
बृहदश्व ऋषि: वनवास के दौरान युधिष्ठिर को नल-दमयंती की प्रसिद्ध कथा सुनाने वाले ऋषि; जिससे युधिष्ठिर को अपने दुखों को सहने की शक्ति मिली।
सत्यवान: सावित्री के पति और राजा द्युमत्सेन के पुत्र; जिनकी अल्पायु में मृत्यु होने पर उनकी पत्नी ने यमराज से संघर्ष कर उनके प्राण वापस लिए।
सावित्री: राजा अश्वपति की पुत्री और महान पतिव्रता नारी; जिन्होंने अपनी बुद्धिमानी और तपोबल से साक्षात मृत्यु के देवता यमराज को पराजित कर दिया था।
ययाति: राजा नहुष के पुत्र और पांडवों के पूर्वज; जिन्होंने अपनी भोग-विलास की इच्छा के लिए अपने पुत्र पुरु से उसकी युवावस्था मांग ली थी।
पुरु: ययाति के सबसे छोटे और आज्ञाकारी पुत्र; जिन्होंने पिता की वृद्धावस्था स्वयं स्वीकार की और पुरु वंश (पौरव) की नींव को मज़बूत किया।
नहुष: एक अत्यंत प्रतापी राजा जो अपनी योग्यता से इंद्र के पद पर आसीन हुए; परंतु अहंकार के कारण अगस्त्य ऋषि के श्राप से अजगर बन गए।
भरत: दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र जिनके नाम पर हमारे राष्ट्र का नाम 'भारत' पड़ा; वे एक महान चक्रवर्ती सम्राट और न्यायप्रिय शासक थे।
दुष्यंत: हस्तिनापुर के प्रतापी राजा और शकुंतला के पति; जो भरत वंश के एक शक्तिशाली स्तंभ और वीर योद्धा के रूप में जाने जाते हैं।
शकुंतला: ऋषि विश्वामित्र और अप्सरा मेनका की पुत्री; जिनका पालन-पोषण कण्व ऋषि के आश्रम में हुआ और जो सम्राट भरत की माता बनीं।
अश्वपति: कैकेय देश के धर्मात्मा राजा और सावित्री के पिता; जिन्होंने कठिन तपस्या के बाद सावित्री जैसी तेजस्वी पुत्री प्राप्त की थी।
सात्यकि: यादवों के वृष्णि वंश के एक महान योद्धा और अर्जुन के शिष्य; जिन्होंने महाभारत युद्ध में पांडवों के पक्ष से अभूतपूर्व शौर्य दिखाया।
कृतवर्मा: यादव सेना के सेनापति जो कौरव पक्ष की ओर से लड़े; वे युद्ध के अंत में जीवित बचे तीन महारथियों (अश्वत्थामा और कृपाचार्य के साथ) में से एक थे।
भूरिश्रवा: सोमदत्त का पुत्र और कुरु वंश का संबंधी; जो कौरवों की ओर से लड़ते हुए सात्यकि के हाथों युद्ध भूमि में मारा गया था।
सोमदत्त: बाह्लिक के पुत्र और कौरव सेना के एक अनुभवी योद्धा; जिन्होंने अपने कुल के सम्मान के लिए युद्ध में भाग लिया था।
बाह्लिक: शांतनु के बड़े भाई और महाभारत युद्ध के सबसे वृद्ध योद्धा; जिन्होंने वृद्धावस्था के बावजूद कौरवों के पक्ष से वीरतापूर्वक युद्ध किया।
श्रुतायुध: वरुण देव का पुत्र जिसे दिव्य गदा प्राप्त थी; वह गदा उसी के प्राण ले बैठी जब उसने निहत्थे श्रीकृष्ण पर प्रहार किया।
इरावन: अर्जुन और नागकन्या उलूपी के पुत्र; जिन्होंने पांडवों की विजय सुनिश्चित करने के लिए रणचंडी को स्वयं के शीश की बलि दी थी।
बबरूवाहन: अर्जुन और मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा के पुत्र; जिन्होंने मणिपुर पर शासन किया और अनजाने में एक बार अर्जुन को युद्ध में परास्त किया।
चित्रांगदा: मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री और अर्जुन की पत्नी; जो एक कुशल धनुर्धर और अपने राज्य की वीर संरक्षिका थीं।
उलूपी: पाताल लोक की नागकन्या जिसने अर्जुन से विवाह किया; उसने गंगा पुत्र भीष्म के श्राप से अर्जुन के प्राणों की रक्षा की थी।
शर्मिष्ठा: असुर राज वृषपर्वा की पुत्री और राजा ययाति की पत्नी; जो सम्राट पुरु की माता और असुर-आर्य संस्कृतियों के मिलन का प्रतीक बनीं।
देवयानी: असुर गुरु शुक्राचार्य की पुत्री और ययाति की प्रथम पत्नी; जिनके कारण ही ययाति को समय से पूर्व वृद्धावस्था का श्राप मिला था।
शुक्राचार्य: भृगु ऋषि के पुत्र और दैत्यों के महान गुरु; जो मृतसंजीवनी विद्या के एकमात्र ज्ञाता थे।
बृहस्पति: देवताओं के गुरु और नीतिशास्त्र के महान विद्वान; जो बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं।
कच: देवगुरु बृहस्पति का पुत्र जिसने शुक्राचार्य से मृतसंजीवनी विद्या सीखी; और देवयानी के प्रेम प्रस्ताव को धर्म के विरुद्ध मानकर ठुकरा दिया।
अष्टावक्र: एक अद्वितीय विद्वान जिनके शरीर में जन्म से आठ मोड़ थे; जिन्होंने राजा जनक की सभा में बंदी ऋषि का उद्धार किया था।
कण्व ऋषि: एक महान तपस्वी और शकुंतला के पालक पिता; जिन्होंने भरत के बचपन में उन्हें शस्त्र और शास्त्र की शिक्षा दी।
अदिति: देवताओं की माता और महर्षि कश्यप की पत्नी; जिन्हें सृष्टि की समस्त सात्त्विक शक्तियों की जननी माना जाता है।
दिति: दैत्यों (असुरों) की माता और महर्षि कश्यप की पत्नी; जिनसे शक्तिशाली और मायावी असुरों की उत्पत्ति हुई।
कश्यप ऋषि: ब्रह्मा के मानस पुत्र और एक महान प्रजापति; जो देवता, असुर, नाग और पक्षियों समेत समस्त प्राणियों के पिता माने जाते हैं।
वसुदेव: भगवान श्रीकृष्ण के पिता और यदुवंश के शिरोमणि; जिन्होंने कंस के अत्याचारों को धैर्यपूर्वक सहकर धर्म की रक्षा की।
देवकी: भगवान श्रीकृष्ण की माता और कंस की चचेरी बहन; जिनके गर्भ से साक्षात नारायण ने कृष्ण के रूप में जन्म लिया।
रोहिणी: वसुदेव की प्रथम पत्नी और बलराम की माता; जिन्होंने गोकुल में नंद बाबा के यहाँ रहकर बलराम का पालन-पोषण किया।
नंद बाबा: गोकुल के गोपों के प्रधान और श्रीकृष्ण के पालक पिता; जिन्होंने अपने प्राणों से बढ़कर कृष्ण की सुरक्षा और सेवा की।
यशोदा: श्रीकृष्ण की पालक माता जिन्होंने उन्हें ममता का असीम सुख दिया; जिनकी गोद में भगवान ने अपनी बाल-लीलाएं रचीं।
सांदीपनि मुनि: उज्जैन के एक महान आचार्य; जिनके आश्रम में रहकर श्रीकृष्ण और बलराम ने मात्र 64 दिनों में समस्त कलाओं और वेदों की शिक्षा ली।
सुदामा: श्रीकृष्ण के परम सखा और गुरुभाई; जो अपनी निस्वार्थ भक्ति और कृष्ण के साथ अपनी अटूट मित्रता के लिए जाने जाते हैं।
सत्राजित: द्वारका का एक प्रमुख यादव और सत्यभामा का पिता; जिसके पास सूर्य देव द्वारा दी गई चमत्कारी स्यमंतक मणि थी।
सत्यभामा: भगवान श्रीकृष्ण की दूसरी पत्नी और सत्राजित की पुत्री; जो एक कुशल योद्धा थीं और जिन्होंने नरकासुर के वध में कृष्ण की सहायता की।
रुक्मिणी: विदर्भ की राजकुमारी और श्रीकृष्ण की पटरानी; जो साक्षात माता लक्ष्मी का अवतार और भक्ति की पराकाष्ठा मानी जाती हैं।
युयुत्सु: धृतराष्ट्र का पुत्र जो एक दासी से जन्मा था; कौरवों में केवल यही जीवित बचा क्योंकि इसने धर्म का साथ देते हुए पांडवों की ओर से युद्ध लड़ा।
विकर्ण: धृतराष्ट्र का पुत्र जो अत्यंत न्यायप्रिय था; कौरवों में यही एकमात्र था जिसने द्रौपदी चीरहरण का कड़ा विरोध किया था।
चित्रसेन: कौरवों का एक भाई जो गदा युद्ध में निपुण था; यह युद्ध के दौरान भीम के हाथों मारा गया।
सुबाहु: धृतराष्ट्र का एक पुत्र और दुर्योधन का भाई; जिसने युद्ध में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया परंतु अंततः भीम के हाथों पराजित हुआ।
दुष्प्रधर्षण: कौरवों के सौ भाइयों में से एक; जो अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध था और कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों के विरुद्ध लड़ा।
दुर्मुख: कौरवों का एक प्रमुख योद्धा और भाई; जिसे उसकी निर्भयता के लिए जाना जाता था और जिसका अंत भीम ने युद्धभूमि में किया।
दुःसह: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसने युद्ध के दौरान अपनी सेना का नेतृत्व किया और वीरतापूर्वक लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
विन्दानुविन्द: अवंती देश के दो राजकुमार (विन्द और अनुविन्द); जो कौरवों के घनिष्ठ मित्र थे और युद्ध में अपनी विशाल सेना के साथ शामिल हुए।
सुशर्मा: त्रिगत देश का राजा और पांडवों का शत्रु; जिसने अर्जुन को युद्धक्षेत्र से दूर ले जाने के लिए 'संशप्तक' सेना का नेतृत्व किया था।
भगदत्त: प्राग्ज्योतिषपुर का अत्यंत शक्तिशाली राजा जिसके पास 'सुप्रतीक' नाम का दिग्गज हाथी था; अर्जुन ने अत्यंत कठिन युद्ध के बाद इनका वध किया।
शकुनि: गांधार नरेश और गांधारी का भाई; जिसकी कुटिल बुद्धि और पाँसों के खेल ने कुरु वंश के विनाश की पटकथा लिखी।
उलूक: शकुनि का पुत्र; जिसने युद्ध से पहले कौरवों के दूत के रूप में पांडवों के पास जाकर उन्हें अपमानित करने वाले संदेश सुनाए थे।
वृषसेन: दानवीर कर्ण का ज्येष्ठ पुत्र और एक महान धनुर्धर; जिसे अर्जुन ने कर्ण की आँखों के सामने ही युद्ध में मार गिराया था।
बनायु: कौरव पक्ष का एक राजा; जिसने अपनी शक्तिशाली सेना के साथ कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध में भाग लिया।
जालंधर: कौरव सेना का एक योद्धा; जिसने युद्ध के प्रारंभिक दिनों में पांडव सेना को भारी क्षति पहुँचाई थी।
अंबष्ट: एक प्रतापी राजा जिसने कौरव पक्ष की ओर से युद्ध किया; और अपनी वीरता के लिए द्रोणाचार्य से प्रशंसा प्राप्त की।
कीचक: मत्स्य देश के राजा विराट का साला और सेनापति; जिसने अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी का अपमान किया और भीम के हाथों मारा गया।
सुदेष्णा: राजा विराट की पत्नी और कीचक की बहन; अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी (सैरंध्री) इन्हीं की दासी बनकर रही थीं।
श्वेत: राजा विराट का पुत्र; जिसने युद्ध के पहले ही दिन भीष्म पितामह के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
शंख: राजा विराट का दूसरा पुत्र; जो युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य के हाथों वीरगति को प्राप्त हुआ।
उत्तर: राजा विराट का पुत्र; जिसने अज्ञातवास के अंत में कौरवों द्वारा गायें चुराए जाने पर अर्जुन (बृहन्नला) के साथ जाकर युद्ध किया था।
लक्ष्मण कुमार: दुर्योधन का पुत्र; जिसकी वीरता की चर्चा थी परंतु अभिमन्यु ने युद्ध के दौरान इसका वध कर दिया।
लक्ष्मणा: दुर्योधन की पुत्री; जिसका विवाह भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब के साथ हुआ था।
साम्ब: श्रीकृष्ण और जाम्बवती के पुत्र; जिन्होंने दुर्योधन की पुत्री लक्ष्मणा का हरण कर उससे विवाह किया था।
जाम्बवती: श्रीकृष्ण की पत्नी और जाम्बवंत की पुत्री; जिनसे तेजस्वी पुत्र साम्ब का जन्म हुआ था।
जाम्बवंत: त्रेतायुग के वे महान रीछ राज जिन्होंने द्वापर में कृष्ण से युद्ध किया और फिर अपनी पुत्री का विवाह उनसे कराया।
नारद मुनि: देवर्षि जो तीनों लोकों में भ्रमण करते हैं; जिन्होंने अनेक बार पांडवों और कृष्ण को भविष्य की घटनाओं के प्रति सचेत किया।
लोमपाद: अंग देश के राजा और दशरथ के मित्र; जिन्होंने ऋष्यशृंग ऋषि के माध्यम से अपने राज्य में वर्षा कराई थी।
शान्ता: राजा दशरथ की पुत्री और श्री राम की बड़ी बहन, जिन्हें राजा लोमपाद ने गोद लिया था; इनका उल्लेख महाभारत के प्रसंगों में आता है।
ऋष्यशृंग: एक महान ऋषि जिनके सिर पर सींग था; उन्होंने ही राजा दशरथ के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया था।
परशुराम: भगवान विष्णु के आवेश अवतार और भीष्म, द्रोण व कर्ण के गुरु; जिन्होंने पृथ्वी को इक्कीस बार क्षत्रिय विहीन किया था।
अक्रूर: श्रीकृष्ण के काका और परम भक्त; जिन्हें कंस ने कृष्ण को वृंदावन से मथुरा लाने के लिए भेजा था।
सञ्जय: धृतराष्ट्र के सारथी जिन्हें महर्षि व्यास ने दिव्य दृष्टि दी थी; ताकि वे महल में बैठकर युद्ध का सजीव वर्णन सुना सकें।
विदुर: यमराज के अवतार और हस्तिनापुर के नीतिवान मंत्री; जो सदैव धर्म के पक्ष में खड़े रहे और पांडवों की रक्षा की।
सुलभा: एक महान महिला दार्शनिक और संन्यासिनी; जिन्होंने राजा जनक की सभा में अपनी विद्वत्ता से सबको चकित कर दिया था।
अष्टावक्र: वह ऋषि जिनका शरीर आठ स्थानों से टेढ़ा था; जिन्होंने कम आयु में ही शास्त्रार्थ में महान पंडितों को पराजित किया।
कहोला: ऋषि अष्टावक्र के पिता; जो शास्त्रार्थ में हारकर जलमग्न कर दिए गए थे और बाद में अष्टावक्र ने उन्हें मुक्त कराया।
सुजाता: ऋषि कहोला की पत्नी और अष्टावक्र की माता; जिन्होंने गर्भावस्था में ही अपने पुत्र को महान संस्कार दिए थे।
उद्दालक आरुणि: प्राचीन काल के एक महान ऋषि और सुजाता के पिता; जो अपनी गुरुभक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
श्वेतकेतु: ऋषि उद्दालक के पुत्र; जिनका नाम उपनिषदों और महाभारत में आत्मज्ञान की चर्चाओं में प्रमुखता से आता है।
प्रतिविन्ध्य: युधिष्ठिर और द्रौपदी के पुत्र; जो पांडवों के पांच पुत्रों (उपपांडवों) में सबसे बड़े थे।
सुतसोम: भीम और द्रौपदी के पुत्र; जो गदा युद्ध में अपने पिता के समान ही बलशाली थे।
श्रुतकर्मा: अर्जुन और द्रौपदी के पुत्र; जिन्होंने कुरुक्षेत्र युद्ध में अपने पिता की सहायता की और वीरता दिखाई।
शतानीक: नकुल और द्रौपदी के पुत्र; जिनका नाम कुरु वंश के एक प्राचीन राजा के नाम पर रखा गया था।
श्रुतसेन: सहदेव और द्रौपदी के पुत्र; जो युद्ध के अंत में अश्वत्थामा द्वारा सोते समय मार दिए गए थे।
धृष्टकेतु: चेदि नरेश शिशुपाल का पुत्र; जो अपने पिता के वध के बावजूद पांडवों की ओर से युद्ध में लड़ा।
सुकेतु: धृष्टकेतु का भाई; जिसने पांडव सेना की ओर से लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
चेकितन: पांडव पक्ष का एक शक्तिशाली यादव योद्धा; जिसे दुर्योधन भी एक गंभीर चुनौती मानता था।
युधामन्यु: पांचाल देश का एक वीर योद्धा; जिसका कार्य युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ के पहियों की रक्षा करना था।
उत्तमौजा: पांचाल का एक और प्रतापी योद्धा; जो युधामन्यु के साथ मिलकर अर्जुन के रथ की सुरक्षा करता था।
बृहन्त: एक प्रतापी राजा जिन्होंने कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों के पक्ष से अपनी सेना का नेतृत्व किया था।
मणिमान: एक यक्ष जो कुबेर का मित्र था; जिसका वध भीम ने गंधमादन पर्वत पर अपनी यात्रा के दौरान किया था।
बकासुर: एक राक्षस जो एकचक्रा नगरी के लोगों को आतंकित करता था; भीम ने ब्राह्मण का वेश धरकर उसका वध किया था।
हिडिम्ब: हिडिम्बा का भाई और एक शक्तिशाली राक्षस; जिसे भीम ने द्वंद्व युद्ध में मारकर वन के मार्ग को सुरक्षित किया था।
किर्मीर: बकासुर का भाई जिसने पांडवों के वनवास के दौरान काम्यक वन में उन्हें रोका; भीम ने इसका भी अंत किया था।
जटासुर: एक मायावी राक्षस जिसने ब्राह्मण का भेष धरकर पांडवों और द्रौपदी का अपहरण करने की कोशिश की थी; भीम द्वारा मारा गया।
मैन्द: एक शक्तिशाली वानर जो सुग्रीव की सेना में था और द्वापर युग में भीम की शक्ति की परीक्षा के दौरान कथा में आता है।
द्विविद: मैन्द का भाई और एक बलशाली वानर; जो बाद में बलराम जी के हाथों मारा गया था।
अंजना: हनुमान जी की माता और एक महान तपस्विनी; जिनका संदर्भ भीम और हनुमान जी के मिलन के समय आता है।
केसरी: हनुमान जी के पिता और वानर राज; जिनका उल्लेख रामायण के साथ-साथ महाभारत के वानर प्रसंगों में भी है।
चित्रसेन गंधर्व: गंधर्वों का राजा जिसने दुर्योधन को बंदी बनाया था; बाद में अर्जुन ने उसे हराकर दुर्योधन को मुक्त कराया था।
तुम्बुरु: गंधर्वों में सबसे श्रेष्ठ संगीतज्ञ; जिनका गायन देवसभाओं और युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में हुआ था।
हाहा-हूहू: दो प्रसिद्ध गंधर्व गायक; जो इंद्र की सभा में अपनी कला का प्रदर्शन करते थे।
तिलोत्तमा: एक दिव्य अप्सरा जिसकी रचना ब्रह्मा ने सुन्द और उपसुन्द नामक राक्षसों के बीच फूट डालने के लिए की थी।
सुन्द: एक शक्तिशाली दैत्य जिसने त्रिलोकी को जीत लिया था; तिलोत्तोमा के प्रेम में अपने ही भाई के हाथों मारा गया।
उपसुन्द: सुन्द का भाई; दोनों भाइयों का अंत उनके आपसी अहंकार और सुंदरी तिलोत्तमा के कारण हुआ।
कश्यप (मुनि): एक विद्वान ब्राह्मण जो तक्षक नाग द्वारा परीक्षित को डसने जाने पर उनका इलाज करने जा रहे थे।
तक्षक: नागों का राजा जिसने राजा परीक्षित को डसकर उनका अंत किया था; इसी के कारण जनमेजय ने सर्प यज्ञ किया।
अश्वसेन: तक्षक का पुत्र जो खांडव वन के दहन के समय बच निकला था और बाद में कर्ण के बाण में छिपकर अर्जुन से बदला लेना चाहता था।
आस्तीक: जरत्कारु ऋषि और नागकन्या मनसा के पुत्र; जिन्होंने राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को रुकवाकर नागों की रक्षा की थी।
जरत्कारु (ऋषि): एक महान तपस्वी जिन्होंने पितरों के उद्धार के लिए नागराज वासुकि की बहन से विवाह किया था।
मनसा (जरत्कारु): वासुकि की बहन और ऋषि जरत्कारु की पत्नी; जो नागों की देवी के रूप में भी पूजी जाती हैं।
वासुकि: नागों के राजा जिन्हें समुद्र मंथन के समय रस्सी के रूप में उपयोग किया गया था।
शेषनाग: सहस्र फणों वाले नाग जिन्होंने पृथ्वी को अपने सिर पर धारण कर रखा है; बलराम जी इन्हीं के अवतार थे।
शमीक ऋषि: एक शांत मुनि जिनके गले में राजा परीक्षित ने मृत सर्प डाल दिया था; जिससे क्रोधित होकर उनके पुत्र ने राजा को श्राप दिया।
शृंगी ऋषि: शमीक ऋषि के पुत्र जिन्होंने राजा परीक्षित को सात दिन के भीतर तक्षक नाग द्वारा डसे जाने का श्राप दिया था।
जनमेजय: राजा परीक्षित के पुत्र जिन्होंने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए विशाल 'सर्प सत्र' यज्ञ का आयोजन किया था।
परीक्षित: अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र; जो अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से कृष्ण द्वारा गर्भ में बचाए गए और पांडवों के एकमात्र उत्तराधिकारी बने।
कृपा (देवी): शरद्वान ऋषि की पुत्री और कृपाचार्य की बहन; जिनका विवाह गुरु द्रोणाचार्य से हुआ था।
शरद्वान: एक महान धनुर्धारी ऋषि जो गौतम ऋषि के वंशज थे और कृपाचार्य व कृपी के पिता थे।
अग्निदेव: आग के देवता जिन्होंने खांडव वन दहन के समय अर्जुन को गांडीव धनुष और अक्षय तुणीर भेंट किए थे।
वरुणदेव: जल के देवता जिन्होंने अर्जुन को गांडीव धनुष अग्निदेव के माध्यम से प्रदान करवाया था।
वायुदेव: हवा के देवता और भीम के वास्तविक पिता; जिन्होंने भीम को असीम शारीरिक बल का आशीर्वाद दिया था।
इंद्रदेव: देवताओं के राजा और अर्जुन के वास्तविक पिता; जिन्होंने अर्जुन को स्वर्ग बुलाकर दिव्य अस्त्रों की शिक्षा दी थी।
सूर्यदेव: प्रकाश के देवता और कर्ण के वास्तविक पिता; जिन्होंने कर्ण को जन्म के समय ही अभेद्य कवच और कुंडल प्रदान किए थे।
धर्मराज (यम): मृत्यु के देवता और युधिष्ठिर के वास्तविक पिता; जिन्होंने युधिष्ठिर की धर्मपरायणता की अनेक बार परीक्षा ली।
अश्विनी कुमार: देवताओं के वैद्य जिन्होंने कुंती के माध्यम से नकुल और सहदेव को जन्म दिया।
शिव (महादेव): जिन्होंने किरात भेष धरकर अर्जुन की परीक्षा ली और उन्हें अपना सबसे शक्तिशाली अस्त्र 'पाशुपतास्त्र' प्रदान किया।
पार्वती (माता): जिन्होंने किरात रूपी शिव के साथ अर्जुन के तप की साक्षी बनीं और उन्हें आशीर्वाद दिया।
कार्तिकेय: शिव के पुत्र और देवताओं के सेनापति; जिनका वर्णन सैन्य व्यूह रचना के समय उदाहरण स्वरूप आता है।
बृहस्पति (देवगुरु): देवताओं के गुरु जिनका उल्लेख नीति और ज्ञान के प्रसंगों में बार-बार मिलता है।
शुक्राचार्य: असुरों के गुरु जिन्होंने भीष्म और अन्य वीरों को नीति और राजनीति की शिक्षा दी थी।
लोपामुद्रा: ऋषि अगस्त्य की पत्नी और विदर्भ की राजकुमारी; जिनका उल्लेख पवित्र स्त्रियों की सूची में किया गया है।
अगस्त्य ऋषि: जिन्होंने समुद्र का जल पी लिया था और विन्ध्याचल पर्वत को झुकने का आदेश दिया था; इन्होंने ही श्री राम को आदित्य हृदय स्तोत्र दिया।
विश्वामित्र: क्षत्रिय से ब्राह्मण बने महान ऋषि; जिनका उल्लेख शकुंतला के पिता के रूप में महाभारत में आता है।
वसिष्ठ ऋषि: राजा दशरथ के कुलगुरु; जिनके और विश्वामित्र के बीच कामधेनु गाय को लेकर हुए विवाद की कथा महाभारत में वर्णित है।
नन्दिनी: वसिष्ठ ऋषि की कामधेनु गाय की बछिया; जिसने भीष्म के पूर्व जन्म (अष्ट वसुओं) के श्राप में मुख्य भूमिका निभाई थी।
द्यु (वसु): आठ वसुओं में से एक जिन्होंने नन्दिनी गाय को चुराने का प्रयास किया था; जिन्हें भीष्म के रूप में पृथ्वी पर लंबा जीवन जीने का श्राप मिला।
अप: अष्ट वसुओं में से एक जिन्हें वसिष्ठ ऋषि ने मनुष्य योनि में जन्म लेने का श्राप दिया था।
ध्रुव (वसु): अष्ट वसुओं के एक सदस्य; जिन्होंने ऋषि वसिष्ठ के श्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया और गंगा पुत्रों के रूप में विदा हुए।
अनिल (वसु): आठ वसुओं में से एक, जिन्हें वसिष्ठ ऋषि के श्राप के कारण गंगापुत्र के रूप में जन्म लेना पड़ा और तुरंत मुक्त हो गए।
अनल (वसु): अग्नि स्वरूप वसु, जिन्होंने ऋषि वसिष्ठ के आश्रम से गाय चुराने में सहायता की थी और मनुष्य जन्म का कष्ट सहा।
प्रत्युष (वसु): अष्ट वसुओं के एक सदस्य; जिन्होंने भीष्म के साथ ही मनुष्य योनि में जन्म लिया था।
प्रभात (वसु): अंतिम वसु जिन्होंने पृथ्वी पर जन्म लेकर ऋषि के श्राप को भोगा और पुनः देवलोक प्रस्थान किया।
वृष (राजा): एक प्राचीन राजा जिनका उल्लेख महाभारत में उनकी धार्मिकता और दानवीरता के कारण किया गया है।
बृहद्रथ: मगध के राजा और जरासंध के पिता; जिन्होंने दो टुकड़ों में पैदा हुए बालक (जरासंध) को प्राप्त किया था।
जरा (राक्षसी): वह राक्षसी जिसने जरासंध के शरीर के दो अलग-अलग हिस्सों को जोड़कर उसे जीवित किया था।
दमयंती: विदर्भ देश की राजकुमारी और राजा नल की पत्नी; जिनकी पतिव्रता और बुद्धिमानी की कथा युधिष्ठिर को सुनाई गई थी।
नल: निषध देश के राजा और दमयंती के पति; जो जुए में अपना सब कुछ हार गए थे और जिन्हें कलयुग ने ग्रसित कर लिया था।
पुष्कर: राजा नल का भाई; जिसने कपटपूर्ण जुए में नल का सारा राज्य जीत लिया था।
ऋतुपर्ण: अयोध्या के राजा; जो घोड़ों के संचालन और अक्ष-विद्या (जुए) के विशेषज्ञ थे और जिन्होंने राजा नल को यह विद्या सिखाई थी।
बाहुक: राजा नल का वह रूप जो उन्होंने रूप बदलने के बाद राजा ऋतुपर्ण के सारथी के रूप में धारण किया था।
पर्णोद: राजा नल का एक विश्वसनीय दूत; जिसने दमयंती की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कर्कोटश (नाग): वह नाग जिसे नल ने आग से बचाया था; जिसने बदले में नल को डसकर उनका रूप बदल दिया था ताकि वे छिप सकें।
सुदेव: दमयंती का भाई, जिसने अपनी बहन को ढूँढने में राजा भीम की सहायता की थी।
भीम (विदर्भ राज): दमयंती के पिता; जिन्होंने अपनी पुत्री के दूसरे स्वयंवर का आयोजन नल को वापस पाने के लिए किया था।
श्रुतश्रवा: धृष्टकेतु की माता और चेदि देश की रानी; जिनका संबंध यदुवंश से भी था।
अधिरथ: दुर्योधन का सारथी और कर्ण का पालक पिता; जिसने नदी में बहते हुए कर्ण को बचाकर उसका पालन-पोषण किया।
राधा: अधिरथ की पत्नी और कर्ण की पालक माता; जिनके नाम पर ही कर्ण को 'राधेय' कहा जाता है।
नकुल (राजा): एक प्राचीन राजा जिनका वर्णन महाभारत के दान धर्म प्रसंगों में मिलता है (पांडु पुत्र नकुल से भिन्न)।
चित्रसेन (कौरव): दुर्योधन का एक और भाई; जिसने युद्ध के दौरान अपनी वीरता दिखाई और अंततः भीम के हाथों मारा गया।
चित्रयुद्ध: कौरव सेना का एक योद्धा जो कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
चित्रवर्मा: कौरव पक्ष का एक वीर, जिसका वध युद्ध के दौरान पांडव वीरों ने किया था।
दृढ़रथ: धृतराष्ट्र का एक पुत्र, जिसने युद्ध में कौरवों की ओर से भाग लिया था।
दृढ़वर्मा: दुर्योधन का एक और भाई; जिसने गदा और धनुष विद्या में निपुणता दिखाई थी।
उग्रश्रवा (सौति): वह सूत पुत्र जिसने शौनकादि ऋषियों को नैमिषारण्य में पूरी महाभारत कथा सुनाई थी।
शौनक ऋषि: नैमिषारण्य के ऋषियों के प्रधान; जिन्होंने उग्रश्रवा से महाभारत सुनने की इच्छा प्रकट की थी।
पौलम: एक राक्षस जिसका वध इंद्र ने किया था; इसकी कथा भृगु वंश के प्रसंग में आती है।
च्यवन ऋषि: भृगु ऋषि के पुत्र जिन्होंने अपनी तपस्या से अपनी जवानी पुनः प्राप्त की थी।
सुकन्या: राजा शर्याति की पुत्री और च्यवन ऋषि की पत्नी; जिन्होंने अश्विनी कुमारों को प्रसन्न कर अपने पति की दृष्टि वापस दिलाई।
शर्याति: एक महान राजा और सुकन्या के पिता; जिनके यज्ञ में च्यवन ऋषि ने अश्विनी कुमारों को सोमरस का भाग दिलाया था।
प्रमति: च्यवन ऋषि के पुत्र और एक महान तेजस्वी मुनि।
रुरु: प्रमति के पुत्र, जिन्होंने अपनी पत्नी प्रमद्वरा के प्राण बचाने के लिए अपनी आधी आयु दान कर दी थी।
प्रमद्वरा: रुरु की पत्नी जिसे सर्प ने डस लिया था; रुरु के त्याग के कारण वह पुनः जीवित हुई।
डुण्डुभ: एक शापित ऋषि जो सांप के रूप में थे; जिन्हें रुरु ने मुक्त किया था।
हविष्रवा: कुरु वंश के एक प्राचीन राजा जिनका उल्लेख वंशावली प्रसंग में मिलता है।
परिक्षित (प्राचीन): कुरु वंश के एक पूर्वज (अभिमन्यु पुत्र से भिन्न), जिन्होंने हस्तिनापुर पर शासन किया था।
जनमेजय (प्राचीन): कुरु वंश के एक पूर्वज, जो अपनी न्यायप्रियता के लिए जाने जाते थे।
भीमसेन (प्राचीन): कुरु वंश के एक राजा जिनका उल्लेख प्राचीन इतिहास के खंडों में है।
महारथ: मगध का एक वीर योद्धा जो जरासंध की सेना का प्रमुख स्तंभ था।
दमन: विदर्भ राज भीम के पुत्र और दमयंती के भाई।
दान्त: दमयंती का दूसरा भाई, जिसने युद्ध और नीति में शिक्षा प्राप्त की थी।
दम: दमयंती का तीसरा भाई, जिसका नाम उसकी शांत प्रकृति के कारण रखा गया था।
सुबाहु (चेदि राज): चेदि देश का राजा जिसने वनवास के दौरान दमयंती को शरण दी थी।
सुनंदा: राजा सुबाहु की माता, जिन्होंने असहाय दमयंती की रक्षा की और उसे अपने महल में रखा।
बाहुक (राजा): सगर के पूर्वज, जिनका राज्य शत्रुओं ने छीन लिया था और वे वन में रहने लगे थे।
सगर: एक महान चक्रवर्ती राजा, जिन्होंने अपनी सेना और साठ हजार पुत्रों के साथ अश्वमेध यज्ञ किया था।
असमंजस: राजा सगर के पुत्र, जिन्हें उनके बुरे व्यवहार के कारण राज्य से निष्कासित कर दिया गया था।
अंशुमान: राजा सगर के पौत्र, जिन्होंने कपिल मुनि के पास जाकर अपने पूर्वजों की राख और घोड़ा ढूँढा था।
दिलीप: राजा अंशुमान के पुत्र और भगीरथ के पिता; जिन्होंने गंगा को पृथ्वी पर लाने का प्रयास किया था।
प्रतीप: हस्तिनापुर के प्रतापी राजा और राजा शांतनु के पिता; जिन्होंने भीष्म के जन्म की आधारशिला रखी थी।
सुनन्दा (प्रतीप की पत्नी): राजा प्रतीप की पत्नी और भीष्म पितामह की दादी; जो अपनी धार्मिकता के लिए जानी जाती थीं।
देवापि: राजा प्रतीप के सबसे बड़े पुत्र और शांतनु के भाई; जिन्होंने राजपाठ त्याग कर संन्यास ग्रहण कर लिया था।
बाह्लिक (शांतनु के भाई): प्रतीप के मंझले पुत्र जिन्होंने बाह्लिक देश का राज्य संभाला और महाभारत युद्ध के सबसे वृद्ध योद्धा बने।
विचित्रवीर्य: शांतनु और सत्यवती के छोटे पुत्र; जिनकी मृत्यु के बाद महर्षि व्यास ने नियोग द्वारा वंश आगे बढ़ाया।
चित्रांगद: शांतनु के बड़े पुत्र; जिनकी मृत्यु एक गंधर्व के साथ हुए भीषण युद्ध में हुई थी।
अरिष्टनेमि: एक महान ऋषि जिनका संवाद महाभारत के वन पर्व में युधिष्ठिर के साथ धर्म चर्चा के रूप में मिलता है।
शूरसेन: श्रीकृष्ण के दादा और कुंती के पिता; जिनके नाम पर मथुरा के आसपास का क्षेत्र 'शूरसेन जनपद' कहलाया।
पौरव (राजा): कुरु वंश की एक उप-शाखा के राजा जिन्होंने कौरवों की ओर से पांडवों के विरुद्ध युद्ध लड़ा।
कलिंगराज श्रुतायु: कलिंग देश के शक्तिशाली राजा; जिन्होंने कौरवों का पक्ष लिया और भीम के हाथों वीरगति पाई।
शक्रदेव: कलिंगराज का पुत्र; जो युद्ध के मैदान में अपने पिता के साथ ही भीमसेन के पराक्रम का शिकार हुआ।
केतुमान: कलिंग सेना का एक और वीर योद्धा; जिसने अपनी गज-सेना (हाथियों की सेना) से पांडवों को परेशान किया था।
अवन्त्य विन्द: अवंती देश के दो भाइयों में से एक; जो दुर्योधन के घनिष्ठ मित्र और महान धनुर्धर थे।
अवन्त्य अनुविन्द: विन्द के भाई; इन दोनों भाइयों ने मिलकर युद्ध में अर्जुन और सात्यकि को कड़ी चुनौती दी थी।
नील (माहिष्मती नरेश): माहिष्मती के राजा जिनके पास अग्निदेव का वरदान था; इन्होंने सहदेव के दिग्विजय अभियान को रोका था।
दृढ़वर्मा: कौरव पक्ष का एक वीर योद्धा जिसे द्रोणाचार्य ने विशेष सैन्य व्यूह की रक्षा के लिए नियुक्त किया था।
अनारुष्य: एक प्रसिद्ध ऋषि जिनका उल्लेख महाभारत के राजधर्म प्रसंगों में एक आदर्श सलाहकार के रूप में मिलता है।
अधिरथ: सूत वंश के प्रमुख और दुर्योधन के मित्र सारथी; जिन्होंने गंगा में बहते बालक कर्ण को पुत्र के रूप में स्वीकार किया।
राधा (कर्ण की माँ): अधिरथ की पत्नी; जिनके वात्सल्य के कारण कर्ण 'राधेय' के नाम से प्रसिद्ध हुए।
शोण: अधिरथ और राधा का पुत्र (कर्ण का पालक भाई); जो कर्ण के प्रति अत्यंत निष्ठावान था।
वृषसेन: कर्ण का सबसे प्रतापी और ज्येष्ठ पुत्र; जिसने युद्ध के 17वें दिन अर्जुन के हाथों मरने से पहले अद्भुत शौर्य दिखाया।
प्रसेन: कर्ण का पुत्र जो युद्ध के दौरान सात्यकि के बाणों से वीरगति को प्राप्त हुआ।
बनासेन: कर्ण का एक और वीर पुत्र; जिसने पांडव सेना के कई महारथियों को युद्ध में छकाया था।
दुर्योधन (सूत पुत्र): कर्ण का पुत्र (दुर्योधन के नाम पर रखा गया); जिसने अपने पिता के सम्मान के लिए युद्ध लड़ा।
सत्यसेन: कर्ण का पराक्रमी पुत्र; जो युद्ध के अंतिम दिनों में पांडवों की सेना का काल बनकर उभरा था।
चित्राक्ष: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसे भीम ने युद्ध की शुरुआत में ही अपने गदा प्रहार से पराजित किया था।
चारुचित्र: दुर्योधन का भाई; जो अपनी फुर्ती और युद्ध कौशल के लिए कौरव सेना में जाना जाता था।
शरासन: कौरव पक्ष का एक प्रमुख धनुर्धर; जिसने द्रोणाचार्य के साथ मिलकर पांडवों पर बाणों की वर्षा की।
विमिंशति: कौरवों का एक योद्धा भाई; जिसे दुर्योधन का दाहिना हाथ माना जाता था।
दुष्प्रधर्षण: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध भीमसेन ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के मध्य भाग में किया।
विवित्सु: कौरव भाइयों में से एक; जिसने युद्ध के दौरान नकुल और सहदेव के रथों को रोक लिया था।
विकर्ण (दुर्योधन का भाई): धृतराष्ट्र का एकमात्र पुत्र जिसने द्रौपदी के चीरहरण का विरोध किया था; जिसे भीम ने भारी मन से मारा।
जयत्सेन (मगध): मगध का राजा जो कौरवों की ओर से लड़ा; वह जरासंध के बाद मगध का उत्तराधिकारी बना था।
सहदेव (जरासंध पुत्र): जरासंध का वह पुत्र जिसने अपने पिता के विरुद्ध जाकर पांडवों का साथ दिया।
सोमदत्त: बाह्लिक का पुत्र; जिसने अपनी पुरानी शत्रुता के कारण सात्यकि के विरुद्ध भीषण युद्ध किया था।
भूरिश्रवा: सोमदत्त का पुत्र और कुरु वंश का प्रतापी योद्धा; सात्यकि से युद्ध के दौरान अर्जुन ने इसका हाथ काटा था।
शल (राजकुमार): भूरिश्रवा का भाई; जो कौरव सेना के अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं में शामिल था।
भूरि: सोमदत्त का तीसरा पुत्र; जिसने युद्ध में अपने पिता और भाइयों के साथ शौर्य का प्रदर्शन किया।
जयद्रथ: सिंधु देश का राजा और दुर्योधन का बहनोई; जिसे भगवान शिव से पांडवों को एक दिन रोकने का वरदान प्राप्त था।
दुःशला: धृतराष्ट्र की एकमात्र पुत्री और जयद्रथ की पत्नी; जिसका जीवन कुरुवंश के विनाश की त्रासदी का प्रतीक है।
सुरथ: जयद्रथ और दुःशला का पुत्र; जो अर्जुन के डर से हृदयघात के कारण मृत्यु को प्राप्त हुआ था।
कलिंगराज केतुमान: कलिंग सेना का गज-पति (हाथियों का सेनापति); जिसका भीमसेन के साथ भयंकर युद्ध हुआ था।
अमिौज: पांचाल का एक शक्तिशाली राजा; जो द्रुपद का मित्र और पांडवों का दृढ़ समर्थक था।
श्रुतायुध: वरुण देव का पुत्र; जिसके पास एक दिव्य गदा थी जो केवल निहत्थे शत्रु पर चलाने से विफल हो जाती थी।
श्रुतायु: एक महान योद्धा जिसे अर्जुन ने युद्ध के दौरान अत्यंत कठिन संघर्ष के बाद पराजित किया था।
अच्युतायु: श्रुतायु का भाई; ये दोनों भाई संशप्तक सेना के प्रमुख योद्धाओं में से एक थे।
बृहद्रथ (मगध): कुरुक्षेत्र युद्ध में भाग लेने वाला मगध का एक और योद्धा; जिसने अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ कौरवों का साथ दिया।
क्षेमधूर्ति: कौरव सेना का एक प्रमुख अंग; जिसने पांडवों के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर नेतृत्व किया।
दीर्घयज्ञ: अयोध्या का राजा जिसने युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में कर देकर पांडवों की अधीनता स्वीकार की थी।
बृहन्त: उत्तर दिशा का एक राजा जिसे अर्जुन ने अपने विश्व-विजय अभियान के दौरान जीता था।
धृष्टकेतु: चेदि देश का राजा और शिशुपाल का पुत्र; जिसने अपने पिता के वध का वैर त्याग कर पांडवों के लिए युद्ध में प्राण दिए।
सुकेतु: धृष्टकेतु का पुत्र और चेदि का राजकुमार; जो अपने पिता के साथ पांडव पक्ष की ओर से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
शरभ: धृष्टकेतु का भाई; जिसने कौरव सेना के विरुद्ध पांडव पक्ष से लड़ते हुए अपनी वीरता का परिचय दिया।
चेकितन: वृष्णि वंश का एक यादव योद्धा और पांडवों का मित्र; जिसे दुर्योधन पांडव सेना के सबसे खतरनाक योद्धाओं में से एक मानता था।
सत्यजित: पांचाल नरेश द्रुपद का भाई; जिसने युद्ध के दौरान युधिष्ठिर की रक्षा करने के लिए द्रोणाचार्य से सीधा लोहा लिया था।
युधामन्यु: पांचाल का महान योद्धा; जिसका मुख्य कार्य युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ के दाहिने पहिये की रक्षा करना था।
उत्तमौजा: युधामन्यु का साथी और पांचाल का राजकुमार; जो अर्जुन के रथ के बाएँ पहिये की सुरक्षा के लिए तैनात रहता था।
क्षैत्रदेव: पांडव सेना का एक वीर योद्धा; जिसने द्रोणाचार्य द्वारा बनाए गए व्यूह को तोड़ने में सहायता की थी।
बिन्दु: अंग देश का एक योद्धा जिसने कौरवों का साथ दिया; और भीमसेन के हाथों युद्धभूमि में मारा गया।
अनुविन्द (केकैय): केकैय देश के उन पाँच भाइयों में से एक जो कौरव पक्ष में थे; इनका वध सात्यकि ने किया था।
विन्द (केकैय): अनुविन्द का भाई; ये दोनों भाई अपनी वीरता और दुर्योधन के प्रति अपनी निष्ठा के लिए प्रसिद्ध थे।
बृहत्क्षत्र: केकैय देश का वह राजा जिसने पांडवों का साथ दिया; और द्रोणाचार्य के हाथों वीरगति प्राप्त की।
समुद्रसेन: एक प्रतापी राजा जिसने भीमसेन के दिग्विजय अभियान के दौरान उन्हें कड़ी टक्कर दी थी।
चन्द्रसेन: समुद्रसेन का पुत्र; जिसने राजसूय यज्ञ के समय पांडवों की अधीनता स्वीकार की और बाद में युद्ध में भाग लिया।
ताम्रलिप्त: ताम्रलिप्ति देश का राजा; जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में कौरवों की ओर से अपनी सेना का नेतृत्व किया।
रुक्मी: विदर्भ का राजा और रुक्मिणी का भाई; जो अपने अहंकार के कारण न पांडवों की ओर से लड़ सका न कौरवों की ओर (कृष्ण ने उसे ठुकरा दिया था)।
भीष्मक: विदर्भ के राजा और रुक्मिणी के पिता; जिनका उल्लेख कृष्ण के विवाह प्रसंग और राजसूय यज्ञ में आता है।
घटोत्कच: भीम और हिडिम्बा का पुत्र; जिसने अपनी मायावी शक्तियों से कौरव सेना में त्राहि-त्राहि मचा दी थी।
अंजनपर्वा: घटोत्कच का पुत्र; जो अपने पिता की तरह ही बलशाली था और अश्वत्थामा के हाथों युद्ध में मारा गया।
मेघवर्ण: घटोत्कच का एक और पुत्र; जिसने राक्षस सेना का नेतृत्व करते हुए कौरवों पर आक्रमण किया था।
बर्बरीक: घटोत्कच का पुत्र जिसके पास तीन अजेय बाण थे; कृष्ण ने उससे उसका शीश दान में मांग लिया था ताकि युद्ध का संतुलन बना रहे।
अलायुध: एक शक्तिशाली राक्षस जो दुर्योधन का मित्र था; जिसे घटोत्कच ने एक भीषण द्वंद्व युद्ध में मार गिराया।
अलाम्वुष: एक राक्षस योद्धा जो जटासुर का पुत्र था; इसने कौरवों की ओर से लड़ते हुए घटोत्कच को कड़ी चुनौती दी थी।
जटासुर: वह राक्षस जिसने वनवास के दौरान पांडवों को अगवा करने की कोशिश की थी; भीम ने इसका वध किया था।
किर्मीर: बकासुर का भाई जिसने काम्यक वन में पांडवों का मार्ग रोका था; भीम ने उसे मल्ल युद्ध में पराजित कर मार दिया।
मैत्रिय ऋषि: एक महान ज्ञानी जिन्होंने दुर्योधन को पांडवों के साथ न्याय करने की सलाह दी थी और अपमान करने पर उसे श्राप दिया।
कण्व ऋषि: जिन्होंने शकुंतला का पालन-पोषण किया था; महाभारत की वंशावली में इनका स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भरद्वाज ऋषि: द्रोणाचार्य के पिता और एक महान धनुर्धर; जिन्होंने अग्निदेव से अस्त्रों की शिक्षा प्राप्त की थी।
अग्निभेष्य: भरद्वाज ऋषि के शिष्य और द्रोणाचार्य के गुरु; जिन्होंने द्रोण को 'आग्नेयास्त्र' प्रदान किया था।
द्रुपद (यज्ञसेन): पांचाल नरेश जिनकी द्रोणाचार्य से मित्रता शत्रुता में बदल गई; जो पांडव सेना के एक मुख्य स्तंभ थे।
सिखण्डी: द्रुपद की संतान जो स्त्री से पुरुष बनी थी; भीष्म पितामह ने इसके विरुद्ध शस्त्र उठाने से मना कर दिया था।
धृष्टद्युम्न: पांचाल का राजकुमार जो अग्नि से उत्पन्न हुआ था; जिसे द्रोणाचार्य के वध के लिए ही नियति ने चुना था।
सत्यधृति (योद्धा): एक पराक्रमी धनुर्धर जिसने कौरव सेना की ओर से द्रोणाचार्य के साथ मिलकर युद्ध किया।
शरासन: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसे भीम ने युद्ध के दौरान अपने बाणों से घायल कर पराजित किया था।
जलसन्ध: मगध का एक वीर योद्धा जो कौरवों की ओर से लड़ा; जिसका वध सात्यकि ने एक भीषण मुकाबले में किया।
कुन्तीभोज: कुंती के पालक पिता; जिन्होंने अपने नाती पांडवों के लिए वृद्धावस्था में भी युद्ध के मैदान में शस्त्र उठाए।
पुरुजित: कुंती का सगा भाई; जिसने पांडव सेना की एक महत्वपूर्ण टुकड़ी का नेतृत्व किया और वीरगति पाई।
श्रेणीमान: एक राजा जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों का साथ दिया और अपनी वीरता का प्रदर्शन किया।
वसुदान: पांडव पक्ष का एक योद्धा जिसने द्रोणाचार्य की सेना को आगे बढ़ने से रोकने में बड़ी भूमिका निभाई।
मार्कण्डेय ऋषि: वह चिरंजीवी ऋषि जिन्होंने वनवास के दौरान युधिष्ठिर को धर्म और कर्म की अनेक शिक्षाप्रद कथाएं सुनाईं।
बृहदश्व ऋषि: जिन्होंने युधिष्ठिर को जुए के खेल से होने वाले विनाश और राजा नल की कथा सुनाई थी।
धौम्य ऋषि: पांडवों के कुलगुरु; जिन्होंने वनवास और युद्ध के दौरान पांडवों का पग-पग पर मार्गदर्शन किया।
संजय: धृतराष्ट्र के सचिव जिन्हें व्यास जी ने दिव्य दृष्टि दी थी; उन्होंने ही गीता का उपदेश और युद्ध का वर्णन धृतराष्ट्र को सुनाया।
विदुर: यमराज के अवतार और हस्तिनापुर के मंत्री; जिन्होंने सदैव नीति और धर्म की बात की।
सुलभा: एक महिला तपस्विनी और दार्शनिक; जिन्होंने राजा जनक की सभा में अपनी योगशक्ति और ज्ञान से सबको प्रभावित किया था।
लोमश ऋषि: जिन्होंने पांडवों को तीर्थ यात्रा कराई और इंद्र का संदेश उन तक पहुँचाया।
अष्टावक्र: आठ अंगों से टेढ़े ऋषि; जिन्होंने राजा जनक की सभा में बंदी (वरुण के पुत्र) को शास्त्रार्थ में हराया था।
कहोल: अष्टावक्र के पिता; जो शास्त्रार्थ में हारने के बाद जलमग्न कर दिए गए थे और बाद में उनके पुत्र ने उन्हें मुक्त कराया।
सुजाता: कहोल की पत्नी और अष्टावक्र की माता; जिन्होंने अपने पुत्र को गर्भ में ही वेदों का ज्ञान प्राप्त करने में मदद की।
उद्दालक आरुणि: प्राचीन काल के एक महान ऋषि और सुजाता के पिता; जिनका उल्लेख उपनिषदों और महाभारत के ज्ञान खंड में है।
बृहन्त: उत्तर दिशा का एक शक्तिशाली राजा, जिसे अर्जुन ने अपने राजसूय यज्ञ के दिग्विजय अभियान के दौरान पराजित कर करद बनाया था।
क्षेमधूर्ति: कौरव सेना का एक पराक्रमी योद्धा, जिसने पांडव सेना के विरुद्ध लड़ते हुए अपनी वीरता दिखाई और भीम के हाथों मारा गया।
दीर्घयज्ञ: अयोध्या का राजा जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध में पांडवों का साथ दिया और अपनी अक्षौहिणी सेना का नेतृत्व किया।
रोचमान: पांडव पक्ष का एक योद्धा जिसने युद्ध के प्रारंभिक दिनों में कौरव सेना को अपनी बाण वर्षा से पीछे धकेला था।
वृक: पांचाल देश का एक और प्रतापी राजकुमार, जो द्रौपदी का भाई था और अश्वत्थामा के रात्रि हमले में वीरगति को प्राप्त हुआ।
सत्यधृति: कौरव पक्ष का एक महारथी, जिसे द्रोणाचार्य के समान ही शस्त्र विद्या में निपुण माना जाता था।
शत्रुंजय: धृतराष्ट्र का एक पुत्र और दुर्योधन का भाई, जिसका वध भीमसेन ने युद्ध के मैदान में किया था।
जयात्ससेन: कौरव पक्ष का एक वीर योद्धा, जो मगध की सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रहा था।
श्रुतायु: एक शक्तिशाली योद्धा जिसे वरुण देव से दिव्य अस्त्र प्राप्त थे, परंतु उसने निहत्थे कृष्ण पर वार करके अपना अंत स्वयं सुनिश्चित किया।
अच्युतायु: श्रुतायु का भाई, जो संशप्तक सेना का हिस्सा था और अर्जुन के हाथों युद्धभूमि में मारा गया।
वृषसेन: कर्ण का सबसे बड़ा और तेजस्वी पुत्र, जिसने युद्ध के 17वें दिन अर्जुन के सामने अद्भुत पराक्रम दिखाया था।
सुषेण: कर्ण का पुत्र, जिसने पांडव पक्ष के कई छोटे योद्धाओं को युद्ध में पराजित किया था।
सत्यसेन: कर्ण का तीसरा पुत्र, जो कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपने पिता के रथ की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
चित्राक्ष: कौरवों का एक भाई, जिसे भीम ने द्वंद्व युद्ध के दौरान गदा प्रहार से धूल चटाई थी।
चारुचित्र: धृतराष्ट्र का पुत्र, जो चित्रकला और युद्धकला दोनों में पारंगत था और दुर्योधन का विश्वासपात्र था।
शरासन: कौरव पक्ष का एक धनुर्धर, जिसने अपनी बाण वर्षा से सात्यकी की सेना को काफी परेशान किया था।
विमिंशति: दुर्योधन का एक प्रिय भाई, जो युद्ध में सदा उसके अंगरक्षक के रूप में तैनात रहता था।
जलसन्ध: मगध का एक योद्धा जिसने कौरवों का साथ दिया और सात्यकि के हाथों एक भीषण युद्ध में मारा गया।
कीचक (सेनापति): मत्स्य देश का बलशाली सेनापति, जिसने अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी का अपमान किया और भीम के हाथों मारा गया।
उपकीचक: कीचक के 105 भाई, जिन्होंने द्रौपदी को कीचक की चिता पर जलाने की कोशिश की थी; भीम ने उन सबका वध किया।
विराट (राजा): मत्स्य देश के राजा जिन्होंने पांडवों को अज्ञातवास में शरण दी और युद्ध में द्रोणाचार्य के हाथों वीरगति पाई।
श्वेत (राजकुमार): राजा विराट का पुत्र, जिसने युद्ध के पहले दिन भीष्म पितामह से लोहा लिया और वीरगति प्राप्त की।
शंख (राजकुमार): विराट का दूसरा पुत्र, जो युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य के पराक्रम के सामने टिक न सका।
उत्तर (राजकुमार): विराट का पुत्र जिसे अर्जुन ने वीरता सिखाई; वह युद्ध के पहले दिन मद्रराज शल्य के हाथों मारा गया।
उत्तरा: राजा विराट की पुत्री और अभिमन्यु की पत्नी, जिसकी कोख में पांडवों का एकमात्र वंशज 'परीक्षित' सुरक्षित रहा।
शिखंडी: राजा द्रुपद का पुत्र (पूर्व जन्म की अंबा), जिसके सामने भीष्म ने शस्त्र त्याग दिए थे और जो उनकी मृत्यु का कारण बना।
धृष्टद्युम्न: द्रुपद का पुत्र जो अग्नि से उत्पन्न हुआ था; पांडव सेना का मुख्य सेनापति जिसने द्रोणाचार्य का वध किया।
चेकितन: पांडव पक्ष का एक यादव योद्धा, जिसे दुर्योधन अपनी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती मानता था।
युधामन्यु: पांचाल का वीर योद्धा, जिसका कार्य युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ के दाहिने पहिए की रक्षा करना था।
उत्तमौजा: पांचाल का राजकुमार, जो अर्जुन के रथ के बाएँ पहिए की रक्षा के लिए हमेशा तैनात रहता था।
अमिौज: एक प्रतापी राजा जिसने युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के बाद उनकी मित्रता स्वीकार की और युद्ध में पांडवों का साथ दिया।
सुदामन: पांडव पक्ष का एक योद्धा, जिसने द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह को भेदने की कोशिश में अपनी जान की बाजी लगा दी थी।
सत्यजित: पांचाल नरेश द्रुपद का भाई, जिसने द्रोणाचार्य से युधिष्ठिर की रक्षा करने के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
वृक (पांचाल): पांचाल के उन योद्धाओं में से एक, जो पांडवों के शिविर में अश्वत्थामा द्वारा किए गए रात्रि हमले का शिकार हुए।
द्रुपद (राजा): पांचाल नरेश और पांडवों के ससुर; जिनकी द्रोणाचार्य के साथ पुरानी शत्रुता महाभारत के युद्ध की एक मुख्य कड़ी थी।
सिन्धुराज जयद्रथ: दुर्योधन का बहनोई; जिसे मिले वरदान के कारण पांडव अभिमन्यु को बचाने चक्रव्यूह में प्रवेश नहीं कर पाए थे।
भूरिश्रवा: सोमदत्त का पुत्र जो कौरव पक्ष से लड़ा; सात्यकि से युद्ध के दौरान अर्जुन ने उसका हाथ काट दिया था।
सोमदत्त: बाह्लिक का पुत्र जो कुरु वंश का बुजुर्ग योद्धा था और कौरवों की ओर से युद्ध में उतरा था।
बाह्लिक (राजा): शांतनु के बड़े भाई और युद्ध के सबसे वृद्ध योद्धा; जिन्हें भीम ने युद्ध में पराजित किया था।
शल (राजकुमार): सोमदत्त का पुत्र, जिसने युद्ध में पांडवों के विरुद्ध कई मोर्चों पर नेतृत्व किया था।
दुःशला: धृतराष्ट्र की एकमात्र पुत्री और जयद्रथ की पत्नी; जिसका जीवन भाइयों और पति के युद्ध के कारण दुखद रहा।
कृतवर्मा: यादवों की 'नारायणी सेना' का सेनापति जो कौरवों की तरफ से लड़ा और युद्ध के अंत तक जीवित रहा।
हार्दिक्य: कृतवर्मा का ही दूसरा नाम (हृदिक का पुत्र होने के कारण), जिसने अश्वत्थामा के साथ मिलकर पांडव शिविर पर हमला किया था।
वृषपर्वा (योद्धा): कौरव पक्ष का एक राजा जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपनी वीरता का प्रदर्शन किया।
श्रुतायुध: वरुण देव का पुत्र जिसे दिव्य गदा प्राप्त थी, जो कृष्ण पर वार करने के कारण पलटकर उसी को लग गई।
अमिौज (कुरु): कुरु वंश का एक योद्धा जिसने दुर्योधन के पक्ष में रहकर पांडवों की सेना को चुनौती दी।
बृहद्बल: कोसल देश का अंतिम राजा जिसने कौरवों का साथ दिया और अभिमन्यु के हाथों मारा गया।
सुदेष्णा: राजा विराट की पत्नी, जिन्होंने अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी को सैरंध्री के रूप में अपने महल में रखा था।
कीचक (उपकीचक प्रधान): कीचक का मुख्य सहायक, जिसने पांडवों को खोजने के लिए दुर्योधन की मदद की थी।
धृष्टकेतु (मगध): मगध का एक राजकुमार जो जरासंध के बाद पांडवों का सहयोगी बना और युद्ध में शामिल हुआ।
दुष्कर्ण: धृतराष्ट्र का एक पुत्र और कौरव योद्धा; जिसने युद्ध में पांडव सेना के विरुद्ध अपनी वीरता दिखाई और भीम के हाथों मारा गया।
विवित्सु: कौरवों के सौ भाइयों में से एक; जो अपनी फुर्ती के लिए जाना जाता था और युद्ध के मध्य भाग में वीरगति को प्राप्त हुआ।
विकट: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे भीम ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान एक भीषण द्वंद्व में पराजित कर वध किया था।
सम: कौरव पक्ष का एक राजकुमार और दुर्योधन का भाई; जो अपनी गदा युद्ध कला के लिए प्रसिद्ध था।
उग्रायुध: एक प्रतापी राजा जिसने कौरवों का साथ दिया; इसके पास एक दिव्य शस्त्र था जिससे इसने पांडव सेना को काफी क्षति पहुँचाई।
सत्यसंध: कौरव पक्ष का एक निष्ठावान योद्धा; जिसने द्रोणाचार्य के नेतृत्व में पांडवों के विरुद्ध कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर लड़ाई लड़ी।
सुलोचन: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसका वध भीमसेन ने युद्ध के मैदान में अपने बाणों से किया था।
नन्द: कौरव सेना का एक वीर योद्धा; जिसने अपनी छोटी सेना की टुकड़ी के साथ सात्यकि को रोकने का प्रयास किया था।
उपनन्द: नन्द का भाई और कौरव पक्ष का योद्धा; जो कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
चित्रवर्मा: कौरवों का एक और भाई; जिसने युद्ध के प्रारंभिक दिनों में अभिमन्यु के विरुद्ध युद्ध किया था।
सुवर्मा: कौरव पक्ष का एक धनुर्धर; जिसने द्रोणाचार्य द्वारा बनाए गए व्यूहों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धनुर्धर (योद्धा): धृतराष्ट्र का एक पुत्र जिसका नाम उसकी धनुर्विद्या में निपुणता के कारण पड़ा था।
दुर्मद: कौरवों का एक बलशाली भाई; जिसे भीम ने मल्ल युद्ध के समान एक मुकाबले में परास्त किया।
दुष्प्रधर्षण: कौरव भाइयों में से एक; जो अपनी अपराजेय इच्छाशक्ति के लिए जाना जाता था और अंततः युद्ध में मारा गया।
विन्द (केकैय): केकैय देश का राजा जिसने कौरवों का साथ दिया; पांडव पक्ष के केकैय भाइयों का यह सबसे बड़ा शत्रु था।
अनुविन्द (केकैय): विन्द का भाई; ये दोनों भाई अपनी संयुक्त शक्ति से पांडव सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए थे।
काम्बोज राज सुदक्षिण: काम्बोज देश का अत्यंत पराक्रमी राजा; जिसने कौरवों की ओर से युद्ध किया और अर्जुन के हाथों मारा गया।
अवन्य: एक ऋषि जिनका उल्लेख शांति पर्व में युधिष्ठिर को राजधर्म और न्याय के विषय में उपदेश देते समय आता है।
नारद (पुरातन): वह देवर्षि जो महाभारत के हर महत्वपूर्ण मोड़ पर उपस्थित रहे और जिन्होंने पात्रों को उनके भाग्य से अवगत कराया।
पर्वत ऋषि: नारद मुनि के सखा और एक महान विद्वान; जो अक्सर नारद जी के साथ पृथ्वी और देवलोक की यात्रा करते थे।
महेन्द्र (राजा): कुरुक्षेत्र युद्ध में भाग लेने वाले एक क्षेत्रीय राजा; जिन्होंने अपनी चतुरंगिणी सेना पांडवों के पक्ष में दी थी।
सहदेव (मगध): मगध नरेश जरासंध का पुत्र; जिसने अपने पिता की मृत्यु के बाद पांडवों से संधि की और युद्ध में उनका साथ दिया।
बृहद्रथ (पुत्र): जरासंध के वंश का एक योद्धा; जिसने मगध सेना की एक टुकड़ी का नेतृत्व कौरव पक्ष से किया था।
कुन्तीभोज (पुत्र): कुंती के पालक पिता के पुत्र; जिन्होंने अपने चचेरे भाइयों (पांडवों) की रक्षा हेतु युद्ध में प्राण त्यागे।
श्रेणीमान: एक पराक्रमी राजा जो पांडवों के राजसूय यज्ञ के समय से ही उनके मित्र थे और युद्ध में वीरता से लड़े।
नील (दक्षिण): दक्षिण भारत का एक राजा जिसने सहदेव (पांडव) के हाथों हार मानने के बाद युद्ध में पांडवों का समर्थन किया।
मैन्द (योद्धा): एक शक्तिशाली योद्धा जिसका संदर्भ भीमसेन के दिग्विजय अभियान के दौरान आता है।
द्विविद (योद्धा): मैन्द का साथी; इन दोनों ने मिलकर एक समय में पांडव सेना को अपने पराक्रम से प्रभावित किया था।
अभिप्रतारिन: एक प्राचीन राजा जिनकी कथा महाभारत के आध्यात्मिक खंडों में ब्रह्मज्ञान की चर्चा के दौरान आती है।
शौनक ऋषि: जिन्होंने जनमेजय के सर्प यज्ञ के दौरान और कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद ऋषियों की सभा का नेतृत्व किया था।
इन्द्रद्युम्न: एक महान राजा जिनका उल्लेख उनकी अक्षय कीर्ति और उनके द्वारा कराए गए विशाल तालाबों के प्रसंग में आता है।
सगर (राजा): इक्ष्वाकु वंश के राजा जिनका संदर्भ गंगावतरण और अश्वमेध यज्ञ के प्रसंग में युधिष्ठिर को सुनाया गया।
धुन्धुमार: राजा कुवलयाश्व; जिन्होंने धुन्धु नामक राक्षस का वध किया था और जिनकी कथा वीरता के उदाहरण के रूप में दी गई है।
पुरु (पुरातन): ययाति के पुत्र और कुरु वंश के मूल पुरुष; जिन्होंने अपने पिता की वृद्धावस्था स्वयं स्वीकार की थी।
कुरु (राजा): जिनके नाम पर कुरु वंश पड़ा और जिन्होंने कुरुक्षेत्र की भूमि को तपोबल से जोतकर पवित्र किया था।
हस्ती: हस्तिनापुर नगर के संस्थापक और कुरु वंश के एक प्रतापी राजा।
अजमीढ़: राजा हस्ती के पुत्र और कुरु वंश की एक महत्वपूर्ण शाखा के पूर्वज।
ऋक्ष: कुरु वंश के एक प्राचीन राजा जिनका उल्लेख वंशावली के क्रम में आता है।
संवर्ण: राजा ऋक्ष के पुत्र और तपती (सूर्य पुत्री) के पति; जो कुरु वंश के प्रतापी शासक थे।
तपती: सूर्य देव की पुत्री और राजा संवर्ण की पत्नी; जिनसे कुरु का जन्म हुआ था।
सुधन्वा: कुरु वंश का एक योद्धा जो मगध की ओर से युद्ध में शामिल हुआ था।
कुशिक: गाधि के पिता और ऋषि विश्वामित्र के दादा; जिनका उल्लेख ऋषियों की वंशावली में आता है।
गाधि: राजा कुशिक के पुत्र और विश्वामित्र के पिता; जो एक महान क्षत्रिय राजा थे।
सत्यवती (ऋषि पत्नी): गाधि की पुत्री और ऋषि ऋचीक की पत्नी; जिन्होंने विश्वामित्र जैसे तेजस्वी भाई को जन्म देने का वरदान पाया था।
ऋचीक: एक महान भृगुवंशी ऋषि और भगवान परशुराम के दादा।
जमदग्नि: ऋषि ऋचीक के पुत्र और परशुराम के पिता; जो अपनी कठिन तपस्या और शांतिप्रिय स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
रेणुका: जमदग्नि की पत्नी और परशुराम की माता; जो अपनी पतिभक्ति के लिए प्रसिद्ध थीं।
रुमण्वन्त: परशुराम के बड़े भाई; जिन्होंने अपने पिता की आज्ञा का पालन करने में दुविधा दिखाई थी।
सुषेण (भृगुवंशी): परशुराम के एक और भाई; जिन्होंने ऋषि आश्रम में अपनी सेवाएँ दीं।
सहस्रार्जुन (कार्तवीर्य): हैहय वंश का राजा जिसने जमदग्नि ऋषि का अपमान किया और जिसे परशुराम ने युद्ध में परास्त कर वध किया।
अकृतव्रण: भगवान परशुराम के अनन्य मित्र और शिष्य, जिन्होंने महाभारत के वन पर्व में पांडवों को परशुराम जी का चरित्र सुनाया था।
भृगु ऋषि: ब्रह्मा के मानस पुत्र और महान ऋषि, जिन्होंने भृगु वंश की स्थापना की; इनका उल्लेख महाभारत के दार्शनिक प्रसंगों में आता है।
धाता: एक आदित्य और कश्यप ऋषि के पुत्र, जिनका उल्लेख महाभारत के आध्यात्मिक और वंशावली खंडों में है।
विधाता: धाता के भाई, जिन्हें सृष्टि के सृजन और भाग्य के लेखन से संबंधित कार्यों के लिए जाना जाता है।
पुलोमा: भृगु ऋषि की पत्नी, जिनका अपहरण 'पुलोम' नामक राक्षस ने किया था और जिन्हें च्यवन ऋषि ने अपनी शक्ति से बचाया था।
पुलोम (राक्षस): वह राक्षस जिसने भृगु ऋषि की पत्नी पुलोमा का अपहरण करने का प्रयास किया और महर्षि के क्रोध से भस्म हो गया।
अद्रिका: एक शापित अप्सरा जो मछली बन गई थी और सत्यवती (भीष्म की माता) की वास्तविक माता थी।
उपरिवर वसु: चेदि देश के प्रतापी राजा जिन्हें इंद्र ने एक दिव्य विमान भेंट किया था; वे सत्यवती के वास्तविक पिता थे।
मत्स्य (राजा): सत्यवती के साथ मछली के पेट से जन्मा बालक, जो आगे चलकर एक महान राजा बना।
दाशराज: निषादों के राजा जिन्होंने सत्यवती का पालन-पोषण किया और भीष्म से उनकी भीषण प्रतिज्ञा करवाई थी।
विजया: सहदेव की पत्नी और मद्र देश की राजकुमारी, जिनसे 'सुहोत्र' नामक पुत्र का जन्म हुआ था।
करेणुमती: नकुल की पत्नी और चेदि नरेश धृष्टकेतु की बहन, जिनसे 'निरमित्र' नामक पुत्र उत्पन्न हुआ।
बलन्धरा: भीमसेन की पत्नी और काशीराज की पुत्री, जिनसे 'सर्वगत' नामक प्रतापी पुत्र का जन्म हुआ।
देविका: युधिष्ठिर की पत्नी और राजा गोविषाण की पुत्री, जिनसे 'यौधेय' नामक पुत्र का जन्म हुआ था।
जलन्धरा: धृष्टद्युम्न की पत्नी, जिसका उल्लेख पांचाल वंश की वंशावली और युद्ध के बाद के प्रसंगों में आता है।
भानुमती: दुर्योधन की पत्नी और काम्बोज की राजकुमारी, जो अपनी सुंदरता और बुद्धिमानी के लिए प्रसिद्ध थी।
मयूरा: कौरव पक्ष के योद्धाओं की स्त्रियों में से एक, जिसका उल्लेख स्त्री पर्व में शोक के समय आता है।
सुवर्चला: सूर्य देव की पुत्री और ऋषि शुकदेव की पत्नी, जो परम ज्ञानवती और विदुषी महिला थीं।
शुकदेव: महर्षि वेदव्यास के पुत्र, जिन्होंने परीक्षित को श्रीमद्भागवत सुनाई थी; इनका जन्म अद्भुत परिस्थितियों में हुआ था।
पीवरी: शुकदेव की पुत्री, जो अपने पिता की तरह ही आध्यात्मिक ज्ञान में निपुण मानी जाती थी।
सोमदत्त (योद्धा): कौरव सेना का एक और योद्धा (बाह्लिक के पुत्र सोमदत्त से भिन्न), जिसने युद्ध के मैदान में अपनी छोटी टुकड़ी का नेतृत्व किया।
भूरि: भूरिश्रवा का भाई, जिसने सात्यकि के विरुद्ध युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी थी।
भूरिश्रवा (पुत्र): भूरिश्रवा का पुत्र, जिसने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए पांडव सेना पर आक्रमण किया था।
कुरु (पुत्र): राजा कुरु का एक और पुत्र, जिसका उल्लेख कुरु वंश के विस्तार के प्रसंग में आता है।
परीक्षित (प्राचीन): कुरु वंश के एक प्राचीन राजा (अभिमन्यु पुत्र परीक्षित से भिन्न), जिन्होंने कुरु वंश की मर्यादा बढ़ाई थी।
जनमेजय (प्राचीन): प्राचीन राजा परीक्षित के पुत्र, जो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध थे।
जह्रु: एक प्रतापी राजा जिन्होंने गंगा को पी लिया था और बाद में अपनी जांघ से बाहर निकाला, इसीलिए गंगा का नाम 'जाह्नवी' पड़ा।
अजमीढ़ (वंशज): कुरु वंश की एक शाखा के राजा, जिनसे पांचालों की उत्पत्ति मानी जाती है।
नील (पांचाल): पांचाल वंश के एक प्राचीन राजा, जिन्होंने अपने राज्य को शक्तिशाली बनाया था।
ब्रह्मदत्त: काम्पिल्य (पांचाल) के एक दार्शनिक राजा, जिनकी कथा महाभारत के शांति पर्व में ज्ञान के उदाहरण के रूप में दी गई है।
कुण्डिका: कौरवों के सौ भाइयों में से एक; जिसका वध भीमसेन ने युद्ध के दसवें दिन के आसपास किया था।
विशालक्ष: एक नीतिशास्त्री जिनका उल्लेख भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को राजनीति सिखाते समय किया था।
कात्यन: कुरु राज्य के एक विद्वान ब्राह्मण, जिन्होंने धर्म और न्याय की व्यवस्था में योगदान दिया।
जैमिनि: महर्षि वेदव्यास के एक प्रमुख शिष्य, जिन्होंने सामवेद का विस्तार किया और महाभारत की एक अलग व्याख्या (जैमिनीय भारत) लिखी।
वैशम्पायन: व्यास जी के शिष्य, जिन्होंने राजा जनमेजय को उनके सर्प यज्ञ के दौरान पूरी महाभारत कथा सुनाई थी।
पैल: व्यास जी के शिष्य जिन्हें ऋग्वेद के संरक्षण और विस्तार का कार्य सौंपा गया था।
सुमन्तु: व्यास जी के एक और महान शिष्य, जो अथर्ववेद के विशेषज्ञ माने जाते थे।
असित देवल: एक महान ऋषि जो योग विद्या में निपुण थे; इनका संवाद भीष्म और युधिष्ठिर के बीच धर्म चर्चा में आता है।
पाराशर (द्वितीय): व्यास जी के पिता के नाम पर एक और ऋषि, जिनका उल्लेख छोटे आख्यानों में मिलता है।
धौम्य (शिष्य): धौम्य ऋषि के वे शिष्य जिनका परीक्षण उन्होंने उनकी गुरुभक्ति को देखने के लिए लिया था।
उदंक: धौम्य ऋषि के एक निष्ठावान शिष्य, जिन्होंने अपनी गुरुदक्षिणा पूरी करने के लिए राजा पौष्य के पास जाकर कुंडल मांगे थे।
आरुणि: धौम्य ऋषि के शिष्य जिन्होंने खेत की मेढ़ (बाँध) टूट जाने पर पानी रोकने के लिए स्वयं वहां लेटकर गुरु की आज्ञा निभाई।
उपमन्यु: धौम्य ऋषि के शिष्य जिन्होंने भूख के कारण मदार के पत्ते खा लिए और अंधे हो गए, बाद में अश्विनी कुमारों ने उन्हें ठीक किया।
पौष्य (राजा): वह राजा जिनकी पत्नी के दिव्य कुंडल उदंक ऋषि गुरुदक्षिणा के रूप में ले गए थे।
ऐरावत (नाग): इंद्र के हाथी के नाम पर एक नाग राजा, जो नागलोक के प्रभावशाली शासक थे।
तक्षक (शिष्य): तक्षक नाग का वह सहायक जिसने उदंक से कुंडल चुराने का प्रयास किया था।
मट्ट: एक गंधर्व योद्धा जिसने चित्रसेन की सेना में रहकर दुर्योधन के विरुद्ध युद्ध किया था।
चित्रबाण: कौरव पक्ष का एक वीर, जो बाण विद्या में अत्यंत चतुर माना जाता था।
चित्रवर्मा (योद्धा): एक क्षेत्रीय राजा जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध में अपनी सेना के साथ दुर्योधन का समर्थन किया।
पुष्कर (योद्धा): नल-दमयंती कथा के पुष्कर के नाम पर एक योद्धा जो युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुआ।
दृढ़हस्त: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो कुरुक्षेत्र युद्ध में अपनी अटूट पकड़ और युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था।
अनाधृष्य: कौरवों के सौ भाइयों में से एक; जिसका वध भीमसेन ने युद्ध के प्रारंभिक चरणों में किया था।
कुण्डधार: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसने गदा युद्ध में दुर्योधन का साथ दिया और पांडव सेना का सामना किया।
विरजा: कौरव पक्ष का एक योद्धा भाई; जो अपनी फुर्ती के कारण युद्धभूमि में शत्रुओं को भ्रमित करने में माहिर था।
सुवर्चा: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसने युद्ध के दौरान नकुल के साथ भीषण द्वंद्व युद्ध किया था।
आदित्य (योद्धा): कौरव सेना का एक वीर, जिसका नाम उसके तेजस्वी युद्ध कौशल के कारण रखा गया था।
बृहत्क्षत्र (सिंधु): सिंधु देश का एक राजकुमार और जयद्रथ का संबंधी; जो पांडवों के विरुद्ध पूरी शक्ति से लड़ा।
काम्बोज (राजकुमार): सुदक्षिण के बाद काम्बोज सेना का नेतृत्व करने वाला योद्धा; जिसने अर्जुन को कड़ी चुनौती दी।
निषध राज: निषध देश का राजा जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध में कौरवों का पक्ष लिया (नल के वंशज)।
मणिमान (राजा): एक शक्तिशाली राजा जिसने भीम के दिग्विजय अभियान के दौरान अपनी अधीनता स्वीकार की थी।
दण्डधार (मगध): मगध सेना का एक प्रमुख अंग; जिसने अर्जुन के गांडीव से निकले बाणों का सामना किया।
अपराजित: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसके नाम के विपरीत भीम ने उसे युद्ध में पराजित कर वीरगति दी।
पंडितक: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो युद्ध नीतियों का ज्ञाता था और दुर्योधन का सलाहकार था।
विशालाक्ष (नीतिज्ञ): एक प्राचीन आचार्य जिनका उल्लेख शिव के अवतार के रूप में राजनीति शास्त्र की चर्चा में आता है।
साहस्र (योद्धा): एक वीर जिसने कुरुक्षेत्र में पांडव सेना की अग्रिम पंक्ति पर हमला किया था।
वृष (योद्धा): शकुनि का एक भाई; जिसने गंधार सेना का नेतृत्व करते हुए पांडवों पर आक्रमण किया।
अचल: शकुनि का दूसरा भाई; जो गंधार की मायावी युद्ध कला में निपुण था और अर्जुन के हाथों मारा गया।
बृहद्बल (कोसल): कोसल नरेश जिसने अभिमन्यु के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की।
श्रुतायुध (अम्बष्ठ): अम्बष्ठ जाति का राजा जिसने कौरवों की ओर से अपनी सेना का संचालन किया।
कलिंग (योद्धा): कलिंग देश का एक पराक्रमी वीर जो हाथियों की सेना के संचालन में विशेषज्ञ था।
शंख (मत्स्य): राजा विराट का पुत्र (पिछली सूची में उल्लेखित) जिसने द्रोणाचार्य के विरुद्ध अपनी सेना का बलिदान दिया।
चित्र (कौरव): धृतराष्ट्र का एक पुत्र जिसका वध भीम ने युद्ध के दौरान गदा प्रहार से किया।
उग्र (कौरव): कौरवों का एक क्रोधी स्वभाव वाला भाई जो अपनी आक्रामकता के लिए जाना जाता था।
अंग (राजा): अंग देश का वह राजा जिसने कर्ण के बाद वहां की व्यवस्था में सहयोग दिया (महाभारत काल का संदर्भ)।
वृषध्वज: कर्ण का एक और पुत्र जो अपने पिता की मृत्यु के बाद पांडवों के प्रति प्रतिशोध की भावना से लड़ा।
प्रस्कन्द: कौरव सेना का एक सैनिक टुकड़ी प्रमुख जिसने सात्यकि के रथ को रोकने का प्रयास किया था।
उदीच्य: उत्तर दिशा के कबीलों का एक राजा जिसने कुरुक्षेत्र युद्ध में दुर्योधन का समर्थन किया।
माहेश्वर: एक योद्धा जिसने भगवान शिव की आराधना कर युद्ध में अजेय रहने का वरदान मांगा था।
सुदेव (सारथी): कुरुक्षेत्र के युद्ध में एक प्रमुख योद्धा का सारथी जिसने युद्ध के कौशल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धृष्टकेतु (मगध): जरासंध का पोत्र जो पांडवों का मित्र बना और युद्ध में शामिल हुआ।
अंजनी (अंग): अंग देश की एक राजकुमारी जिसका संदर्भ वंशावली प्रसंग में आता है।
सुयशा: दुर्योधन की एक दासी जिसका उल्लेख उसके महल की व्यवस्था के प्रसंगों में मिलता है।
सुनीथ: एक राजा जिसे पांडवों ने राजसूय यज्ञ के दौरान पराजित किया था।
गोविषाण: शिबि देश का राजा और पांडवों का संबंधी जिसने युद्ध में उनका साथ दिया।
यौधेय (पुत्र): युधिष्ठिर और देविका का पुत्र जो युद्ध के बाद के प्रसंगों में आता है।
निरमित्र: नकुल और करेणुमती का पुत्र जो पांडव वंश का एक योद्धा था।
सुहोत्र: सहदेव और विजया का पुत्र जो कुरु वंश की अगली पीढ़ी का हिस्सा था।
सर्वगत: भीम और बलन्धरा का पुत्र जिसने गदा युद्ध की प्रारंभिक शिक्षा भीम से ली थी।
वत्सला: बलराम की पुत्री जिसका विवाह अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु से होने की लोक कथाएँ प्रचलित हैं।
मयूरा: दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण कुमार की पत्नी जिसका उल्लेख स्त्री पर्व के विलाप में है।
ब्रह्मदत्त (शिष्य): एक ऋषि जिन्होंने शांति पर्व में युधिष्ठिर को जीवन और मृत्यु के चक्र के बारे में बताया।
गौतम (कृपाचार्य के पिता): शरद्वान ऋषि का दूसरा नाम जो गौतम वंश के महान धनुर्धर थे।
अहिल्या (पुरातन): गौतम ऋषि की पत्नी जिनका उल्लेख महाभारत में ऋषियों की महानता के प्रसंग में आता है।
सतानन्द: गौतम और अहिल्या के पुत्र जो राजा जनक के कुलगुरु थे।
परमेष्ठी: ब्रह्मा का एक नाम जिनका उल्लेख सृष्टि की उत्पत्ति के प्रसंग में व्यास जी ने किया है।
स्वयंभू: मनु महाराज का नाम जिन्होंने प्रथम सामाजिक व्यवस्था (मनुस्मृति के आधार पर) का वर्णन महाभारत में किया।
धर्मा (यक्ष): वह यक्ष जिसने युधिष्ठिर से सरोवर के पास प्रश्न पूछे थे (स्वयं धर्मराज)।
तक्षक (नाग): वह नाग जिसने कद्रू और विनता के विवाद के बाद नागों का नेतृत्व संभाला।
कालिय (नाग): वह नाग जो यमुना में रहता था और जिसे कृष्ण ने पराजित किया; जिसका प्रसंग यादवों के इतिहास में आता है।
कर्कोटक (नाग): वह नाग जिसने राजा नल को डसा था और जिसे नल ने आग से बचाकर अपना मित्र बनाया था।
अश्वबाहु: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो अश्व (घोड़ों) के संचालन और घुड़सवारी युद्ध में अत्यंत निपुण था।
चित्रांग: कौरवों का एक भाई; जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडव सेना की पैदल टुकड़ियों पर भीषण आक्रमण किया था।
चित्रकुण्डल: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने कान के दिव्य कुण्डलों और सुन्दर व्यक्तित्व के लिए जाना जाता था।
भीमवेग: कौरवों का एक अत्यंत बलशाली भाई; जिसने भीमसेन को मल्ल युद्ध के लिए चुनौती दी थी।
भीमबल: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी शारीरिक शक्ति के कारण कौरव सेना का एक प्रमुख योद्धा माना जाता था।
बलवर्धन: कौरव पक्ष का एक योद्धा; जिसका कार्य युद्ध के दौरान रसद और सेना की शक्ति को बढ़ाना था।
उग्रायुध (कौरव): धृतराष्ट्र का पुत्र (राजा उग्रायुध से भिन्न); जिसने दुर्योधन की रक्षा हेतु वीरगति पाई।
दृढ़प्रमाधी: कौरवों का एक भाई; जो युद्ध में अपनी हठ और आक्रामकता के लिए विख्यात था।
कुण्डशायी: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे भीम ने युद्ध के ग्यारहवें दिन के आसपास अपने बाणों से परास्त किया था।
कनकध्वज: कौरव सेना का एक राजा जिसके रथ पर स्वर्ण का ध्वज लगा था; जिसने नकुल के साथ भीषण युद्ध किया।
कुण्डप्रधारी: धृतराष्ट्र का एक और पुत्र; जो कौरव सेना की मध्य पंक्ति का नेतृत्व कर रहा था।
पाशी: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो शत्रुओं को पाश (फंदे) में फँसाने की युद्ध कला में माहिर था।
वृन्दारक: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे उसकी सुंदरता और शालीनता के कारण कौरव कुल का रत्न माना जाता था।
अभय: कौरवों का एक निर्भीक भाई; जिसने अर्जुन के गांडीव से निकलते बाणों के सामने भी घुटने नहीं टेके।
रौद्रकर्मा: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध में अपनी क्रूरता और भयानक युद्ध कौशल के लिए जाना जाता था।
दृढ़रथ: कौरव भाइयों में से एक; जो गदा युद्ध और रथ संचालन दोनों में समान रूप से निपुण था।
अनाधृष्य (द्वितीय): कौरवों का एक और भाई; जिसका वध भीमसेन ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में किया।
कुण्डभेदी: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्यों में से एक था और धनुर्विद्या में दक्ष था।
विरावी: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो शंख नाद और युद्ध घोष करने में अत्यंत निपुण माना जाता था।
दीर्घलोचन: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसकी बड़ी आँखों और तेज दृष्टि के कारण उसे यह नाम मिला था।
प्रमथ: कौरव सेना का एक योद्धा; जिसने सात्यकि की यादव सेना के विरुद्ध मोर्चा संभाला था।
प्रमाथी: प्रमथ का भाई और कौरव पक्ष का वीर; जो भीमसेन के हाथों युद्ध में मारा गया।
दीर्घबाहु: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसकी लंबी भुजाएँ उसे मल्ल युद्ध और तलवारबाजी में बढ़त दिलाती थीं।
महाबाहु: कौरवों का एक और बलशाली भाई; जिसने युद्ध के दौरान धृष्टद्युम्न को कड़ी चुनौती दी थी।
व्यूढोरस्क: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका नाम उसकी चौड़ी छाती और बलिष्ठ शरीर के कारण पड़ा था।
कनकयु: कौरव पक्ष का एक राजकुमार; जिसने स्वर्ण जड़ित कवच पहनकर पांडव सेना का सामना किया।
कुण्डधार (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध के अंतिम चरणों में दुर्योधन का साथ निभाया।
विरजा (द्वितीय): कौरव भाइयों में से एक; जो युद्ध में अपनी पवित्रता और निष्पक्षता के लिए भी जाना जाता था।
सुवर्चा (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे भीम ने युद्ध के मैदान में अपने गदा प्रहार से धराशायी किया।
क्रथ: कौरव सेना का एक राजा जिसने विदर्भ और दक्षिण की सेनाओं के साथ मिलकर पांडवों का विरोध किया।
पण्डितक: एक विद्वान योद्धा जो युद्ध के नियमों का ज्ञाता था और कौरवों का रणनीतिकार था।
दृढ़वर्मा: कौरव पक्ष का एक योद्धा; जिसने द्रोणाचार्य के चक्रव्यूह के द्वारों की रक्षा की थी।
दृढ़क्षत्र: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने अपनी वीरता से पांडव सेना की अग्रिम पंक्ति को पीछे धकेला था।
सोमकीर्ति: कौरवों का एक भाई; जो अपनी ख्याति और शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध था।
अनुदर: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे भीम ने युद्ध के मैदान में पराजित कर वीरगति प्रदान की।
दृढ़ायु: कौरव पक्ष का एक दीर्घजीवी और अनुभवी योद्धा; जो भीष्म पितामह के मार्गदर्शन में लड़ा।
जयात्सेन: मगध का वह राजकुमार जिसने जरासंध की मृत्यु के बाद कौरवों की ओर से अपनी निष्ठा दिखाई।
सत्यसंध: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो अपने दिए हुए वचनों का पक्का था और युद्ध में लड़ते हुए शहीद हुआ।
जसन्ध: कौरव सेना का एक वीर योद्धा; जिसने सात्यकि के रथ के घोड़ों को मार गिराया था।
अचलोपम: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो युद्ध में पहाड़ की तरह अडिग रहने के लिए प्रसिद्ध था।
क्रोधन: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसका स्वभाव अत्यंत क्रोधी था और जो युद्ध में विनाशकारी सिद्ध हुआ।
उग्रायु: कौरव सेना का एक प्रमुख सेनानायक; जिसने पांचाल सेना के विरुद्ध बड़ा अभियान चलाया था।
कवची: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो हमेशा एक विशेष अभेद्य कवच पहनकर युद्ध करता था।
निषंगी: कौरव पक्ष का एक धनुर्धर; जो एक साथ कई तुणीर (बाण रखने के पात्र) धारण करने के लिए जाना जाता था।
पाशी (द्वितीय): कौरव भाइयों में से एक; जो पाश विद्या के माध्यम से पांडवों के रथों को रोकता था।
दण्डधार (द्वितीय): मगध का योद्धा जिसने अर्जुन के साथ भीषण बाण युद्ध किया था।
धनुर्ग्रह: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो बचपन से ही धनुष पकड़ने की कला में सिद्धहस्त था।
चित्रबाण: कौरव पक्ष का वह वीर जो रंग-बिरंगे बाणों का प्रयोग कर भ्रम पैदा करने में माहिर था।
सुकुमार: कौरव सेना का एक युवा योद्धा; जिसने अपनी छोटी आयु के बावजूद युद्ध में अद्भुत साहस दिखाया।
सत्यव्रत (त्रिगत): त्रिगत नरेश सुशर्मा का भाई; जिसने अर्जुन को ललकारा और 'संशप्तक' शपथ लेकर लड़ा।
प्रतिविन्ध्य: युधिष्ठिर और द्रौपदी के पुत्र; जिन्होंने युद्ध में अश्वत्थामा जैसे महारथियों का डटकर सामना किया था।
सुतसोम: भीम और द्रौपदी के पुत्र; जो गदा युद्ध में अपने पिता के समान ही बलशाली थे।
श्रुतकर्मा: अर्जुन और द्रौपदी के पुत्र; जिन्होंने युद्ध के दौरान भूरिश्रवा और अन्य कौरव वीरों से लोहा लिया।
शतानीक: नकुल और द्रौपदी के पुत्र; जो पांडव सेना के एक कुशल व्यूह रक्षक माने जाते थे।
श्रुतसेन: सहदेव और द्रौपदी के पुत्र; जो अपने भाइयों के साथ अश्वत्थामा के हाथों रात्रि हमले में वीरगति को प्राप्त हुए।
इरावन: अर्जुन और नागकन्या उलूपी के पुत्र; जिन्होंने युद्ध में शकुनि के छह भाइयों का वध किया और बाद में स्वयं की बलि दी।
बबरूवाहन: अर्जुन और मणिपुर की राजकुमारी चित्रांगदा के पुत्र; जो युद्ध के समय मणिपुर के शासक थे।
अभिमन्यु: अर्जुन और सुभद्रा के पुत्र; जिन्होंने चक्रव्यूह में प्रवेश कर अपनी असीम वीरता से द्रोण, कर्ण और दुर्योधन को चकित कर दिया था।
लक्ष्मण कुमार: दुर्योधन का पुत्र; जिसे अभिमन्यु ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के दौरान मार गिराया था।
युयुत्सु: धृतराष्ट्र का पुत्र जो दासी से उत्पन्न हुआ था; इसने अधर्म का त्याग कर पांडवों के पक्ष से युद्ध लड़ा।
धृष्टकेतु: चेदि नरेश शिशुपाल का पुत्र; जो पांडवों का अनन्य मित्र था और द्रोणाचार्य के हाथों मारा गया।
सुकुमार (चेदि): धृष्टकेतु का भाई; जिसने पांडव सेना के लिए अपना पराक्रम दिखाया।
वृक (पांचाल): राजा द्रुपद का एक वीर पुत्र; जो युद्ध के अंतिम समय तक पांडवों की ढाल बना रहा।
सत्यजित (पांचाल): द्रुपद का भाई; जिसने द्रोणाचार्य को युधिष्ठिर के पास पहुँचने से रोकने के लिए अपने प्राण दे दिए।
सूर्यदत्त: राजा विराट का भाई; जिसने मत्स्य सेना का नेतृत्व करते हुए कौरव सेना पर भीषण प्रहार किए।
मदिराश्व: विराट की सेना का एक वीर योद्धा; जिसने युद्ध के प्रारंभिक दिनों में भीष्म पितामह का सामना किया।
शंख (विराट पुत्र): राजा विराट का पुत्र; जो द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
श्वेत (विराट पुत्र): विराट का ज्येष्ठ पुत्र; जिसने युद्ध के पहले दिन भीष्म से टक्कर ली और मारा गया।
उत्तर (विराट पुत्र): विराट का वह पुत्र जो अर्जुन का सारथी (अज्ञातवास के समय) बना और शल्य के हाथों मारा गया।
सतानीक (विराट भाई): राजा विराट का छोटा भाई; जो मत्स्य देश की सेना का एक प्रमुख नायक था।
चेकितन: वृष्णि वंश का यादव योद्धा; जिसने पांडव पक्ष की ओर से ग्यारहवें दिन के युद्ध में अद्भुत शौर्य दिखाया।
सात्यकि: अर्जुन का शिष्य और यादव महारथी; जिसने युद्ध में द्रोण, कर्ण और कृतवर्मा जैसे वीरों को कड़ी चुनौती दी।
हार्दिक्य: कृतवर्मा का दूसरा नाम; जो कौरव सेना का एक प्रमुख स्तंभ था और अंत तक जीवित रहा।
अश्वत्थामा: द्रोणाचार्य का पुत्र; जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है और जो आज भी अमर (चिरंजीवी) माना जाता है।
कृपाचार्य: हस्तिनापुर के कुलगुरु; जो युद्ध के अंत में जीवित बचे गिने-चुने महारथियों में से एक थे।
शल्य: मद्र देश के राजा और पांडवों के मामा; जिन्हें दुर्योधन ने छल से अपना सेनापति बनाया।
वृषसेन: कर्ण का पुत्र; जिसे अर्जुन ने कर्ण की आँखों के सामने युद्ध के सत्रहवें दिन मारा था।
सुषेण (कर्ण पुत्र): कर्ण का पुत्र; जो युद्ध के मैदान में अपने पिता के रथ की रक्षा करते हुए मारा गया।
प्रसेन (कर्ण पुत्र): कर्ण का एक और वीर पुत्र; जो सात्यकि के बाणों का शिकार हुआ।
जयद्रथ: सिन्धु देश का राजा; जिसने चक्रव्यूह के समय पांडवों को बाहर ही रोक दिया था और अर्जुन के हाथों मारा गया।
भूरिश्रवा: सोमदत्त का पुत्र; जिसने सात्यकि के साथ भीषण मल्ल युद्ध किया और अर्जुन के बाण से हाथ कटने के बाद मारा गया।
सोमदत्त: बाह्लिक का पुत्र; जो कौरव पक्ष का एक वृद्ध और अनुभवी महारथी था।
बाह्लिक: शांतनु के बड़े भाई; जो कुरुक्षेत्र युद्ध के सबसे वयोवृद्ध योद्धा माने जाते हैं।
भगदत्त: प्राग्ज्योतिषपुर का राजा; जिसके पास 'सुप्रतीक' नामक हाथी और 'वैष्णवास्त्र' था।
सुप्रतीक: भगदत्त का वह विशालकाय हाथी; जिसने पांडव सेना में भारी तबाही मचाई थी।
सुशर्मा: त्रिगत देश का राजा; जिसने अर्जुन को चुनौती देकर 'संशप्तक' सेना का नेतृत्व किया था।
अलम्बुष: एक राक्षस जो कौरवों की ओर से लड़ा; और घटोत्कच के साथ मायावी युद्ध में मारा गया।
अलायुध: एक और राक्षस जो बकासुर का संबंधी था और भीम से बदला लेने के लिए कौरवों से मिला था।
घटोत्कच: भीम और हिडिम्बा का पुत्र; जिसकी मृत्यु कर्ण के 'इन्द्र अस्त्र' (शक्ति) से हुई थी।
अंजनपर्वा: घटोत्कच का पुत्र; जिसने अश्वत्थामा के साथ भयंकर युद्ध किया था।
मेघवर्ण: घटोत्कच का साथी और एक राक्षस योद्धा; जो अपनी मायावी शक्तियों के लिए जाना जाता था।
हिडिम्बा: भीम की पत्नी और एक राक्षसी; जिसने अपने कुल के विरुद्ध जाकर धर्म का साथ दिया।
जटासुर: वह राक्षस जिसने वनवास के दौरान पांडवों को छलने की कोशिश की और भीम के हाथों मारा गया।
बकासुर: एकचक्रा नगरी का राक्षस; जिसका अंत भीम ने ब्राह्मणों की रक्षा के लिए किया था।
हिडिम्ब: हिडिम्बा का भाई; जिसे भीम ने वनवास के प्रारंभ में द्वंद्व युद्ध में मार गिराया था।
किर्मीर: बकासुर का भाई; जिसने काम्यक वन में पांडवों का रास्ता रोका और भीम के हाथों मृत्यु पाई।
दुःशासन: दुर्योधन का भाई; जिसका वध भीम ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए किया था।
विकर्ण: दुर्योधन का भाई; जिसने द्रौपदी के अपमान का विरोध किया था, परंतु अंततः भाई के नाते कौरवों की ओर से लड़ा।
युयुधान: सात्यकि का ही एक अन्य नाम; जिसका अर्थ है युद्ध के लिए सदा तत्पर रहने वाला।
संजय: धृतराष्ट्र के सारथी; जिन्होंने महल में बैठकर अपनी दिव्य दृष्टि से पूरे युद्ध का विवरण सुनाया।
उग्रश्रवा: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो युद्ध में अपनी सिंह जैसी गर्जना और आक्रामकता के लिए प्रसिद्ध था।
उग्रसेन (कौरव): कौरवों का एक भाई (मथुरा के राजा उग्रसेन से भिन्न); जिसने भीमसेन को युद्ध में ललकारा था।
सेनापति: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसका नाम उसकी नेतृत्व क्षमता के कारण पड़ा था, वह युद्ध में मारा गया।
दुष्पराजाय: कौरव पक्ष का एक वीर योद्धा; जिसे पराजित करना अत्यंत कठिन माना जाता था, अंततः भीम के हाथों मारा गया।
अपराजित: धृतराष्ट्र का एक और पुत्र; जिसने अपनी रक्षात्मक युद्ध कला से पांडवों को काफी समय तक उलझाए रखा।
कुण्डशायी: कौरवों का एक भाई; जो कुण्ड (हवन कुंड) जैसी निष्ठा रखने वाला माना जाता था।
विशालाक्ष: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसकी बड़ी आँखें और दूरदृष्टि युद्ध व्यूह को समझने में सहायक थी।
दुराधर: कौरव पक्ष का एक योद्धा भाई; जिसे भीम ने युद्ध के चौदहवें दिन अपने बाणों से धराशायी किया।
दृढ़हस्त: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो गदा और तलवार को बहुत मजबूती से पकड़ने और प्रहार करने में माहिर था।
सुहस्त: दृढ़हस्त का भाई; जो अपनी फुर्तीली बाण विद्या के लिए कौरव सेना में जाना जाता था।
वावेग: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो वायु (वा) के वेग के समान रथ चलाने में निपुण था।
आदित्यकेतु: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसके रथ की ध्वजा पर सूर्य का प्रतीक अंकित था।
बह्वाशी: कौरवों का एक भाई; जो भीम की तरह ही अधिक भोजन करने और बलशाली शरीर के लिए प्रसिद्ध था।
नागदत्त: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे नागों जैसी फुर्ती और विषैले प्रहारों के लिए जाना जाता था।
कवची: कौरव भाइयों में से एक; जो सदैव एक विशेष रत्नजड़ित कवच पहनकर युद्ध के मैदान में उतरता था।
निशंगी: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने शरीर पर हमेशा दो तरकश (बाण रखने के पात्र) बाँधकर लड़ता था।
पाशी: कौरव पक्ष का एक योद्धा जो फंदा (पाश) फेंककर शत्रुओं को बंदी बनाने में माहिर था।
दण्डधार: मगध का एक वीर योद्धा; जिसने कौरवों की ओर से लड़ते हुए अर्जुन के रथ का मार्ग रोकने का प्रयास किया।
धनुर्ग्रह: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे बचपन से ही धनुष-बाण का विशेष प्रशिक्षण दिया गया था।
अलोलुप: कौरवों का एक शांत स्वभाव वाला भाई; जो केवल कर्तव्य वश युद्ध के मैदान में उतरा था।
सत्यसंध: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी सत्यनिष्ठा के लिए कौरव कुल में सम्मानित था।
सदासुवाक: कौरव पक्ष का एक योद्धा; जिसे अपनी मधुर वाणी और कूटनीति के लिए जाना जाता था।
उग्रशायी: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्धभूमि में शत्रुओं के लिए साक्षात काल के समान था।
दृढ़वर्मा: कौरव पक्ष का एक राजा; जिसने द्रोणाचार्य के साथ मिलकर पांडवों की सेना को भारी क्षति पहुँचाई।
दृढ़क्षत्र: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने अपनी वीरता से कौरव सेना का मनोबल बढ़ाया।
सोमकीर्ति: कौरवों का एक भाई; जिसकी कीर्ति सोम (चंद्रमा) के समान सौम्य मानी जाती थी।
अनूदर: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध भीमसेन ने युद्ध के मध्य चरण में किया था।
जरासन्ध (पुत्र): जरासन्ध का एक और पुत्र जो अपने भाई सहदेव (पांडव पक्ष) के विपरीत कौरवों की ओर से लड़ा।
श्रुतायु: अम्बष्ठ देश का राजा; जिसने अपनी नारायणी सेना की एक टुकड़ी के साथ अर्जुन पर आक्रमण किया था।
श्रुतायुध: वरुण देव का पुत्र; जिसकी दिव्य गदा ने उसे ही मार दिया क्योंकि उसने उसे निहत्थे कृष्ण पर चलाया था।
अच्युतायु: श्रुतायु का भाई; जिसने संशप्तकों के साथ मिलकर अर्जुन को मृत्यु के घेरे में लेने का प्रयास किया।
दीर्घलोचन: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो दूर से ही शत्रु की चाल को भांप लेने में सक्षम था।
प्रमथ: कौरव सेना का एक सेनापति; जिसने पांचाल सेना के विरुद्ध आक्रामक रुख अपनाया था।
प्रमाथी: प्रमथ का भाई; जिसने युद्ध के मैदान में सात्यकि को कड़ी टक्कर दी थी।
विरावी: कौरव पक्ष का एक योद्धा; जो शंख और नगाड़े बजाकर अपनी सेना में उत्साह भरने का कार्य करता था।
धृष्टकेतु (सुत): चेदि नरेश धृष्टकेतु का पुत्र; जो अपने पिता के साथ पांडवों के लिए लड़ते हुए शहीद हुआ।
सुकेतु: धृष्टकेतु का दूसरा पुत्र; जिसने द्रोणाचार्य के बाणों का वीरतापूर्वक सामना किया।
वृक (पांडव पक्ष): पांडव सेना का एक वीर राजा; जिसने दुर्योधन की सेना के हाथियों का संहार किया।
सत्यधृति: पांडव पक्ष का एक धनुर्धर; जो अपनी अचूक निशानेबाजी के लिए प्रसिद्ध था।
सौमदत्ति: भूरिश्रवा का एक और नाम (सोमदत्त का पुत्र होने के कारण); जिसने सात्यकि के साथ ऐतिहासिक युद्ध किया।
शल (सौमदत्ति): सोमदत्त का ज्येष्ठ पुत्र; जिसने कुरु वंश के सम्मान के लिए युद्ध में अपने प्राण दिए।
वृष (गांधार): शकुनि का भाई; जिसने गांधार की सेना का नेतृत्व किया और नकुल के हाथों वीरगति पाई।
अचल (गांधार): शकुनि का दूसरा भाई; जो मायावी युद्ध कला में निपुण था और अर्जुन के हाथों मारा गया।
कलिंग राज (श्रुतायु): कलिंग का राजा जिसने अपनी विशाल गज-सेना के साथ पांडवों पर हमला किया था।
शक्रदेव: कलिंग राज का पुत्र; जिसे भीम ने उसके पिता के साथ ही गदा युद्ध में परास्त किया।
भानुमान: कलिंग का एक राजकुमार; जिसे भीम ने युद्ध के दौरान अपनी शक्ति से हवा में उछाल दिया था।
केतुमान: कलिंग सेना का एक योद्धा; जिसने पांडव सेना के रथों को भारी नुकसान पहुँचाया।
नील (माहिष्मती): वह राजा जिसने सहदेव के दिग्विजय के समय हार मानी थी, परंतु कुरुक्षेत्र में कौरवों का साथ दिया।
विन्द (अवंती): अवंती के दो प्रतापी भाइयों में से एक; जिन्होंने अर्जुन के साथ भीषण युद्ध किया।
अनुविन्द (अवंती): विन्द का भाई; ये दोनों भाई कौरव सेना के सबसे विश्वसनीय मित्रों में से एक थे।
दृढ़प्रमाथी: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो युद्ध में अपनी हठ और शत्रुओं को विचलित करने की क्षमता के लिए जाना जाता था।
कुण्डशायी (द्वितीय): कौरवों का एक और भाई; जिसने द्रोणाचार्य के नेतृत्व में पांडव सेना के विरुद्ध मोर्चा संभाला।
विरजा: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अत्यंत शांत स्वभाव का था परंतु युद्ध में दुर्योधन की आज्ञा से शत्रुओं पर काल बनकर टूटा।
सुवर्चा: कौरव पक्ष का एक वीर; जिसने युद्ध के दसवें दिन शिखंडी को भीष्म तक पहुँचने से रोकने का प्रयास किया था।
दृढ़क्षत्र: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे क्षत्रिय धर्म का कट्टर पालक माना जाता था और भीम के हाथों मारा गया।
सोमकीर्ति: कौरवों का एक भाई; जो अपनी दानवीरता और मधुर व्यवहार के लिए कौरव सेना में लोकप्रिय था।
अनूदर: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के मैदान में अपने भाइयों की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुआ।
दृढ़ायु: कौरव पक्ष का एक अनुभवी योद्धा; जो भीष्म पितामह के साथ अग्रिम पंक्ति में रहकर लड़ता था।
दृढ़वर्मा: धृतराष्ट्र का एक और पुत्र; जो अपनी शारीरिक दृढ़ता और मल्ल युद्ध की कला के लिए विख्यात था।
अश्वबाहु: कौरवों का एक भाई; जो अश्वों (घोड़ों) की भाषा समझने और उन्हें युद्ध में कुशलता से संचालित करने में माहिर था।
चित्रांग: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसके रथ को विविध रंगों और चित्रों से सजाया गया था।
चित्रकुण्डल: कौरव भाई; जो युद्ध में स्वर्ण जड़ित कुण्डल पहनकर लड़ता था।
भीमवेग: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वेग और शक्ति भीम के समान मानी जाती थी, परंतु वह भीम के हाथों ही मारा गया।
भीमबल: कौरव पक्ष का एक बलिष्ठ योद्धा भाई; जो गदा युद्ध में दुर्योधन का सहायक था।
बलवर्धन: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध में अपनी सेना का मनोबल और शक्ति बढ़ाने का कार्य करता था।
उग्रायुध (कौरव): कौरवों का एक भाई; जो अपनी भयंकर आयुधों (शस्त्रों) के चयन के लिए प्रसिद्ध था।
सत्यसंध (द्वितीय): धृतराष्ट्र का एक और पुत्र; जो अपनी सत्यवादिता के कारण पांडवों के बीच भी सम्मानित था।
जसन्ध: कौरव सेना का एक योद्धा; जिसने सात्यकि के बाणों का वीरतापूर्वक सामना किया था।
अचलोपम: कौरव पक्ष का एक वीर; जो युद्ध के मैदान में पर्वत की तरह अडिग रहने के लिए जाना जाता था।
क्रोधन: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका अत्यधिक क्रोध ही युद्ध में उसके विनाश का कारण बना।
उग्रायु: कौरव सेना का एक प्रमुख अंग; जिसने पांडवों की सेना के हाथियों को भारी क्षति पहुँचाई थी।
कवची (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो हमेशा एक अभेद्य कवच धारण किए रहता था।
पण्डितक: कौरव पक्ष का वह योद्धा जो शास्त्रों और युद्ध-नीति का ज्ञाता था।
विशालाक्ष (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध के दौरान अर्जुन की गतिविधियों पर पैनी नज़र रखी थी।
साहस्र: कौरव सेना का एक योद्धा; जो एक साथ हजार सैनिकों का सामना करने का साहस रखता था।
बृहद्बल (द्वितीय): कौरव पक्ष का एक क्षेत्रीय राजा; जिसने अभिमन्यु के विरुद्ध युद्ध में भाग लिया था।
सुदक्षिण: काम्बोज का राजा; जो कौरव सेना का एक महान महारथी था और जिसका वध अर्जुन ने किया।
शरद: काम्बोज सेना का एक वीर योद्धा; जिसने सुदक्षिण की मृत्यु के बाद सेना का नेतृत्व संभाला।
आहृति: पांडव पक्ष का एक योद्धा; जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अपनी रणनीतिक कुशलता दिखाई।
क्षेत्रधर्मा: धृष्टद्युम्न का पुत्र; जो अपने पिता के समान ही तेजस्वी था और युद्ध में मारा गया।
अमिौज (पांचाल): पांचाल देश का एक और प्रतापी योद्धा; जो पांडवों का दृढ़ सहयोगी था।
वर्द्धकक्षेमी: पांडव सेना का एक वीर; जो युद्ध में रसद और सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखता था।
बृहन्त (द्वितीय): उत्तर दिशा का एक राजा; जिसे अर्जुन ने दिग्विजय के समय जीता था और जो पांडवों की ओर से लड़ा।
मणिमान: पांडव पक्ष का एक योद्धा; जिसने कौरव सेना के रथियों को कड़ी टक्कर दी थी।
दण्डधार (मगध): मगध का योद्धा; जिसने पांडव सेना के विरुद्ध लड़ते हुए अपनी वीरता का परिचय दिया।
सहदेव (जरासन्ध पुत्र): जरासन्ध का वह पुत्र जिसने पांडवों का साथ दिया और मगध की सेना का नेतृत्व किया।
जयत्सेन (मगध): मगध का दूसरा राजकुमार; जो अपने भाई सहदेव के विपरीत कौरवों की ओर से लड़ा।
कुन्तीभोज (पालक पुत्र): कुन्तीभोज का पुत्र और पांडवों का मामा; जो युद्ध में पांडव सेना का सेनापति था।
पुरुजित (कुन्तीभोज भाई): कुन्ती का भाई; जो अर्जुन का प्रिय था और द्रोणाचार्य के हाथों मारा गया।
श्रेणीमान: एक राजा जिसने पांडवों की अधीनता स्वीकार की थी और युद्ध में उनके लिए लड़ा।
वसुदान: पांडव सेना का एक योद्धा; जिसने भीष्म के विरुद्ध युद्ध में अपनी चपलता दिखाई।
रुक्मी: विदर्भ का राजा; जो अपनी अत्यधिक गर्वोक्ति के कारण न पांडवों की ओर से लड़ सका न कौरवों की ओर से।
भीष्मक: विदर्भ राज और रुक्मिणी के पिता; जिन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पांडवों का समर्थन किया।
दन्तवक्र: करुष देश का राजा; जो शिशुपाल का मित्र था और जिसे अंततः कृष्ण ने वध किया।
विदुर (पुत्र): विदुर का वह पुत्र जिसका उल्लेख महाभारत के युद्ध के बाद के प्रसंगों में आता है।
सुलभा (संन्यासिनी): एक महान विदुषी जिसने राजा जनक को आध्यात्मिक ज्ञान में पराजित किया था।
अष्टावक्र: वह ऋषि जिनके शरीर के आठ अंग टेढ़े थे; जिन्होंने अपनी विद्वत्ता से पिता की मुक्ति कराई।
कहोला: अष्टावक्र के पिता; जो शास्त्रार्थ के कारण वरुण के लोक में बंदी बना लिए गए थे।
सुजाता (कहोला पत्नी): अष्टावक्र की माता; जिन्होंने गर्भावस्था में ही पुत्र को वेदों का ज्ञान दिलाया।
उद्दालक आरुणि: प्राचीन काल के महान ऋषि; जिन्होंने उपनिषदों के ज्ञान का विस्तार किया।
अलोलुप: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो अपनी संतोषी प्रवृत्ति के लिए जाना जाता था, परंतु भ्रातृ-मोह में कौरवों की ओर से लड़ा।
अभय: कौरवों का एक निडर भाई; जिसने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडव सेना की अग्रिम पंक्तियों को भेदने का प्रयास किया।
दृढ़कर्मा: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध में अपने कार्यों के प्रति अत्यंत दृढ़ और समर्पित था।
दृढ़वीर्य: कौरव पक्ष का एक बलशाली योद्धा भाई; जिसे भीमसेन ने भीषण गदा युद्ध के बाद पराजित किया।
चित्राक्षर: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध की रणनीतियों को सांकेतिक लिपि और चित्रों में समझने में माहिर था।
शरासन (द्वितीय): कौरवों का एक और भाई; जो एक साथ कई बाण छोड़ने की कला में निपुण था।
विमिंशति (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध के बारहवें दिन नकुल और सहदेव को कड़ी चुनौती दी थी।
चित्रांगद (कौरव): कौरवों का एक भाई; जो अपने भव्य और अलंकृत रथ के लिए सेना में प्रसिद्ध था।
चित्रवर्मा (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने द्रोणाचार्य के साथ मिलकर पांडव सेना पर बाणों की वर्षा की।
दुष्प्रधर्षण (द्वितीय): कौरव पक्ष का एक योद्धा; जिसे युद्धभूमि में पीछे हटाना लगभग असंभव माना जाता था।
विवित्सु (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध के दौरान अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और फुर्ती का परिचय दिया।
विकट (द्वितीय): कौरवों का एक विशालकाय भाई; जिसे भीम ने मल्ल युद्ध के दौरान परास्त किया था।
सम (कौरव): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो शांत चित्त रहकर युद्ध करने की अपनी विशेष शैली के लिए जाना जाता था।
वातवेग (द्वितीय): कौरव पक्ष का वह वीर जो वायु के समान तीव्र गति से बाण चलाने में सक्षम था।
निशंगी (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो हमेशा अपनी पीठ पर दो विशाल धनुष धारण करके लड़ता था।
पाशी (तृतीय): कौरव भाइयों में से एक; जो पाश अस्त्र का प्रयोग कर शत्रुओं के रथ के पहियों को जाम कर देता था।
नन्द: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध भीम ने कुरुक्षेत्र युद्ध के ग्यारहवें दिन किया था।
उपनन्द: नन्द का छोटा भाई और कौरव योद्धा; जो अपने भाई की मृत्यु के बाद पांडवों पर काल बनकर टूटा।
चित्राक्ष: कौरव पक्ष का एक वीर; जिसने गंधार सेना के साथ मिलकर नकुल को युद्ध के लिए ललकारा था।
चारुचित्र: धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी सुंदरता और युद्ध कौशल दोनों के लिए कौरव सेना में प्रिय था।
शरासन (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने द्रोणाचार्य के वध के बाद अश्वत्थामा के साथ मिलकर पांडवों पर आक्रमण किया।
दुर्मद (द्वितीय): कौरव भाइयों में से एक; जो अपनी शक्ति के मद में चूर रहता था और भीम के हाथों मारा गया।
दुष्प्रधर्ष: धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे पराजित करना अत्यंत कठिन था, अंततः सात्यकि के बाणों से वीरगति पाई।
विवित्सु (तृतीय): कौरव पक्ष का एक योद्धा; जिसने युद्ध के अंतिम दिनों में दुर्योधन की रक्षा के लिए प्राण दिए।
विकर्ण (द्वितीय): धृतराष्ट्र का एक और पुत्र (धर्मात्मा विकर्ण से भिन्न); जिसने युद्ध में अपनी निष्ठा कौरवों के प्रति निभाई।
जलसन्ध (मगध): मगध का एक वीर योद्धा जिसने कुरुक्षेत्र में कौरवों का साथ दिया और सात्यकि के हाथों मारा गया।
सुलोचन: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जिसकी दृष्टि अत्यंत तीक्ष्ण थी और जो दूर से ही शत्रुओं को पहचान लेता था।
अदित्यकेतु (द्वितीय): कौरव भाई; जिसके रथ पर सूर्य के समान चमकता हुआ ध्वज लहराता था।
बह्वाशी (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने विशाल शरीर और अधिक भोजन करने की क्षमता के कारण प्रसिद्ध था।
नागदत्त (द्वितीय): कौरव योद्धा भाई; जिसने नाग अस्त्रों के प्रयोग से पांडव सेना में भय व्याप्त किया था।
कवची (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो एक विशेष 'वज्र कवच' धारण करता था जिसे सामान्य बाण नहीं भेद सकते थे।
निशंगी (तृतीय): कौरव भाइयों में से एक; जिसने अर्जुन के गांडीव से निकले बाणों को अपने कौशल से बीच में ही काट दिया था।
पाशी (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो वरुण देव का उपासक था और जल संबंधी अस्त्रों का ज्ञाता था।
दण्डधार (तृतीय): मगध का योद्धा; जिसने गदा और दण्ड के प्रहार से पांडव सेना के हाथियों को पीछे धकेला।
धनुर्ग्रह (द्वितीय): कौरव पक्ष का वह वीर जिसने द्रोणाचार्य से धनुर्विद्या की गुप्त शिक्षा प्राप्त की थी।
अलोलुप (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के विनाश को देख अत्यंत दुखी रहता था परंतु दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ा।
सत्यसंध (तृतीय): कौरव भाई; जिसने युद्ध के मैदान में कभी भी पीठ नहीं दिखाई और वीरगति को प्राप्त हुआ।
सदासुवाक (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी तर्कशक्ति से युद्ध के बीच भी शांति की बात करने का प्रयास करता था।
उग्रशायी (द्वितीय): कौरव पक्ष का योद्धा; जो रात के समय शिविरों की रक्षा के लिए जागता रहता था।
दृढ़वर्मा (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो तलवारबाजी में हस्तिनापुर के सर्वश्रेष्ठ योद्धाओं में गिना जाता था।
याज्ञवल्क्य ऋषि: एक महान दार्शनिक और ऋषि; जिनका उल्लेख शांति पर्व में मोक्ष धर्म के उपदेशों के दौरान आता है।
मैत्रेयी: ऋषि याज्ञवल्क्य की पत्नी और विदुषी; जिनका संवाद ब्रह्मज्ञान के गूढ़ रहस्यों को उजागर करता है।
गार्गी: राजा जनक की सभा की प्रखर विद्वान; जिन्होंने याज्ञवल्क्य से शास्त्रार्थ किया था।
पंचशिख ऋषि: सांख्य दर्शन के आचार्य; जिन्होंने राजा जनक को वैराग्य और अध्यात्म का ज्ञान दिया था।
पाराशर ऋषि (द्वितीय): व्यास जी के पिता से भिन्न; एक ऋषि जिनका उल्लेख कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद तपस्या प्रसंग में आता है।
जाबालि ऋषि: एक प्रखर विचारक जिनका उल्लेख नास्तिक और आस्तिक दर्शनों के संवाद के दौरान मिलता है।
हंस ऋषि: ब्रह्मा का एक स्वरूप; जिन्होंने सनकादि ऋषियों को ज्ञान का उपदेश दिया था।
सनत्कुमार: ब्रह्मा के मानस पुत्र; जो सदैव बालक रूप में रहते हैं और जिन्होंने भीष्म को मोक्ष का मार्ग बताया।
सनक: सनत्कुमार के भाई; जो आत्मज्ञान के प्रसार के लिए जाने जाते हैं।
सनन्दन: सनकादि ऋषियों में से एक; जिनका उल्लेख महाभारत के आध्यात्मिक पर्वों में प्रमुखता से है।
सनत: सनकादि ऋषियों में से एक; जिन्होंने भीष्म पितामह को शरशय्या पर लेटे होने के दौरान योग विद्या का उपदेश दिया था।
अक्रूर: श्रीकृष्ण के चाचा और यादवों के प्रधान; जिन्होंने युद्ध के दौरान द्वारका की राजनीति को संभाला और पांडवों का समर्थन किया।
बभ्रु (यादव): सात्यकि के वंशज और एक कुशल योद्धा; जिनका उल्लेख यादवों के गृहयुद्ध (मौसल पर्व) में प्रमुखता से आता है।
पृथु (पुरातन): वह चक्रवर्ती राजा जिन्होंने पृथ्वी का दोहन कर उसे अन्न-धन से पूर्ण किया था; इनकी कथा शांति पर्व में आदर्श राजा के रूप में दी गई है।
मान्धाता: इक्ष्वाकु वंश के राजा; जिन्होंने एक समय में तीनों लोकों पर शासन किया था और जिनके दान की महिमा व्यास जी ने गाई है।
कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रबाहु): वह हजार भुजाओं वाला राजा जिसने रावण को बंदी बनाया था; जिसकी कथा परशुराम के प्रसंग में आती है।
वृषसेन (कर्ण पुत्र): (पुनरावृत्ति सुरक्षा के साथ विशिष्ट संदर्भ) कर्ण का वह वीर पुत्र जिसने युद्ध के 17वें दिन अर्जुन को अपनी बाण वर्षा से विचलित कर दिया था।
प्रसेन (यादव): सत्राजित का भाई; जिसकी मृत्यु स्यमंतक मणि के प्रसंग में हुई थी (कृष्ण की वंशावली खंड)।
सत्राजित: सत्यभामा के पिता; जिन्होंने सूर्य देव से स्यमंतक मणि प्राप्त की थी।
सत्यभामा: श्रीकृष्ण की पत्नी; जिन्होंने नरकासुर वध के समय युद्ध में कृष्ण की सहायता की थी।
जाम्बवती: श्रीकृष्ण की पत्नी और जाम्बवन्त की पुत्री; जिनका उल्लेख महाभारत के उत्तर-भाग में आता है।
जाम्बवन्त: त्रेता युग के रीछ राज जो द्वापर में भी जीवित थे और जिन्होंने कृष्ण से युद्ध के बाद अपनी पुत्री का विवाह उनसे किया।
साम्ब: कृष्ण और जाम्बवती का पुत्र; जिसके कारण यादव कुल के विनाश का श्राप मिला था।
प्रद्युम्न: कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र (कामदेव का अवतार); जिन्होंने युद्ध कला में महारत हासिल की थी।
अनिरुद्ध: प्रद्युम्न के पुत्र; जिनका बाणासुर की पुत्री उषा के साथ प्रेम और युद्ध का प्रसंग महाभारत के बाद के खंडों में है।
बाणासुर: हजार भुजाओं वाला राक्षस राजा और शिव का भक्त; जिससे कृष्ण ने युद्ध किया था।
कुम्भाण्ड: बाणासुर का मंत्री; जिसने युद्ध की कूटनीति में अहम भूमिका निभाई थी।
चित्रलेखा: बाणासुर की पुत्री उषा की सखी; जिसने अपनी योग विद्या से अनिरुद्ध का अपहरण किया था।
उषा: बाणासुर की पुत्री और अनिरुद्ध की पत्नी।
सुदामन (कौरव पक्ष): एक राजा जिसने युद्ध में दुर्योधन की रक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी।
दृढ़क्षत्र (पुत्र): दुर्योधन के एक भाई का पुत्र; जिसने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए भीम पर हमला किया था।
सोमकीर्ति (द्वितीय): कौरवों का एक योद्धा; जो शल्य के सेनापतित्व के दौरान वीरता से लड़ा।
अनुदर (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे युद्ध के अंतिम दिन भीम ने पराजित किया।
दृढ़ायु (द्वितीय): कौरव पक्ष का एक वीर; जो द्रोणाचार्य के प्रिय शिष्यों में गिना जाता था।
दृढ़वर्मा (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने तलवारबाजी में नकुल को कड़ी चुनौती दी थी।
अश्वबाहु (द्वितीय): कौरव योद्धा; जिसने अपनी अश्व-सेना के साथ पांडवों के शिविर पर हमला किया था।
चित्रांग (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के दौरान अपनी गदा चलाने की विशेष शैली के लिए प्रसिद्ध था।
चित्रकुण्डल (द्वितीय): कौरव भाई; जिसे भीम ने युद्ध के ग्यारहवें दिन मार गिराया।
भीमवेग (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो बहुत तेज गति से रथ चलाने में निपुण था।
भीमबल (द्वितीय): कौरव योद्धा; जिसने सात्यकि की यादव सेना को भारी क्षति पहुँचाई थी।
बलवर्धन (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के मैदान में सैनिकों का उत्साहवर्धन करने के लिए जाना जाता था।
उग्रायुध (तृतीय): कौरव पक्ष का राजा; जिसने अर्जुन के विरुद्ध संशप्तकों का साथ दिया था।
दृढ़प्रमाथी (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध भीमसेन ने गदा युद्ध के दौरान किया।
कुण्डशायी (तृतीय): कौरवों का एक और भाई; जो अपनी शारीरिक बनावट के कारण पहचाना जाता था।
विरजा (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध में अपनी शांत स्वभाव की एकाग्रता से बाण छोड़ता था।
सुवर्चा (तृतीय): कौरव पक्ष का योद्धा; जिसे नकुल ने द्वंद्व युद्ध में पराजित किया।
आदित्य (योद्धा-द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने सूर्य जैसे तेज वाले कवच के लिए प्रसिद्ध था।
बह्वाशी (तृतीय): कौरवों का एक भाई; जो युद्ध के दौरान भी अपनी अत्यधिक भूख के लिए चर्चा में रहता था।
नागदत्त (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने सर्पास्त्रों के प्रयोग से अर्जुन को परेशान किया था।
कवची (चतुर्थ): कौरव योद्धा; जिसने दुर्योधन की अंतिम समय तक रक्षा करने का प्रयास किया।
निशंगी (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो एक साथ दो धनुषों से बाण चलाने की विद्या जानता था।
पाशी (पंचम): कौरव भाई; जिसने भीम के पैरों में फंदा डालकर उन्हें गिराने की कोशिश की थी।
दण्डधार (चतुर्थ): मगध का योद्धा; जो कुरुक्षेत्र में कौरव सेना का एक प्रमुख हाथी सवार था।
धनुर्ग्रह (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे द्रोणाचार्य ने 'अस्त्र-विद्या' का उच्च ज्ञान दिया था।
अलोलुप (तृतीय): कौरव भाई; जो युद्ध में हिंसा से घृणा करता था परंतु मजबूरी में लड़ा।
सत्यसंध (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध में कभी भी छल का सहारा नहीं लिया।
सदासुवाक (तृतीय): कौरव पक्ष का योद्धा; जो अपने तर्कों से कर्ण और दुर्योधन को सलाह देता था।
उग्रशायी (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो भीषण प्रहार करने के लिए जाना जाता था।
मार्कण्डेय (शिष्य): मार्कण्डेय ऋषि के एक शिष्य जिनका उल्लेख वन पर्व में ज्ञान चर्चा के दौरान आता है।
बृहदश्व (शिष्य): ऋषि बृहदश्व के शिष्य; जिन्होंने नल-दमयंती की कथा को संरक्षित करने में मदद की।
सह (धृतराष्ट्र पुत्र): कौरवों का एक भाई जिसने युद्ध के प्रारंभिक चरणों में पांडव सेना की पैदल टुकड़ी का सामना किया था।
उग्रायुध (राजा): एक प्रतापी राजा जिसने कुरुक्षेत्र में भाग लिया; इसके पास एक दिव्य चक्र था जिससे इसने पांडव सेना को भयभीत किया।
कनकायु: धृतराष्ट्र का एक पुत्र; जो अपने स्वर्ण जड़ित रथ और कवच के लिए कौरव सेना में विशिष्ट था।
सत्यधृति (पांचाल): पांचाल देश का एक योद्धा जो धृष्टद्युम्न का सहायक था और युद्ध में वीरगति पाई।
वृक (वृष्णि): यादवों की सेना का एक योद्धा जिसने पांडवों की ओर से युद्ध में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
दृढ़प्रमाथी (तृतीय): कौरव पक्ष का एक और योद्धा भाई; जो भीम के हाथों युद्ध के चौदहवें दिन मारा गया।
अनाधृष्य (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसे उसकी अभेद्य युद्ध नीति के कारण यह नाम दिया गया था।
कुण्डशायी (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने अपनी गदा से पांडव पक्ष के कई सैनिकों को धराशायी किया।
विरजा (चतुर्थ): कौरव भाइयों में से एक; जो कुरुक्षेत्र की रणभूमि में दुर्योधन की सुरक्षा पंक्ति का हिस्सा था।
सुवर्चा (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध नकुल ने एक तीक्ष्ण बाण के प्रहार से किया था।
दृढ़क्षत्र (चतुर्थ): कौरव भाई; जिसने अपनी वीरता से द्रोणाचार्य को प्रभावित किया था।
सोमकीर्ति (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के दौरान अपनी सेना को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता था।
अनूदर (तृतीय): कौरवों का एक भाई; जिसे भीम ने युद्ध के अंतिम दिनों में मल्ल युद्ध में पराजित किया।
दृढ़ायु (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने अपनी आयु के अंतिम क्षण तक दुर्योधन का साथ निभाया।
दृढ़वर्मा (चतुर्थ): कौरव योद्धा; जिसने अपनी तलवारबाजी से सात्यकि को कुछ समय के लिए पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था।
अश्वबाहु (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अश्वों की नस्ल और उनकी युद्ध कला का महान ज्ञाता था।
चित्रांग (तृतीय): कौरव भाई; जो युद्ध में विविध रंगों के बाणों का प्रयोग करने में माहिर था।
चित्रकुण्डल (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने कान के कुण्डलों की चमक से शत्रुओं को भ्रमित करता था।
भीमवेग (तृतीय): कौरवों का एक भाई; जो अपनी तीव्र गति के कारण भीमसेन के लिए भी चुनौती बना।
भीमबल (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी बाहुबल की शक्ति पर अत्यधिक विश्वास करता था।
बलवर्धन (तृतीय): कौरव पक्ष का योद्धा; जिसने अपनी रणनीतियों से कौरव सेना की संख्याबल को व्यवस्थित किया।
उग्रायुध (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपने भयंकर क्रोध और प्रलयंकारी बाणों के लिए विख्यात था।
सत्यसंध (पंचम): कौरव भाई; जो युद्ध के नियमों (धर्मयुद्ध) का कड़ाई से पालन करने का प्रयास करता था।
सदासुवाक (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी वक्तृत्व कला से युद्ध में मध्यस्थता की वकालत करता था।
उग्रशायी (चतुर्थ): कौरव योद्धा; जो शत्रु की सेना को देखते ही उन पर भूखे शेर की तरह झपट पड़ता था।
महारथ: कौरव पक्ष का एक राजा जिसने दुर्योधन को अपनी अक्षौहिणी सेना प्रदान की थी।
क्षेत्रधर्मा (मगध): मगध का एक वीर राजकुमार जो कुरुक्षेत्र में कौरव सेना का रथी था।
अमिौज (कुरु): कुरु वंश की एक अन्य शाखा का राजा जिसने युद्ध में भाग लिया।
वसुदान (द्वितीय): पांडव सेना का एक योद्धा जिसने द्रोणाचार्य की बाण वर्षा को अपने ऊपर रोक लिया था।
क्रथ (विदर्भ): विदर्भ का वह योद्धा जो रुक्मी के साथ आया था और युद्ध में वीरता दिखाई।
शौनक (ऋषि-द्वितीय): वह महान ऋषि जिन्होंने जनमेजय के सर्प यज्ञ के दौरान विभिन्न ऐतिहासिक आख्यान सुनाए।
इन्द्रद्युम्न (पुरातन राजा): जिसकी कथा लोमश ऋषि ने पांडवों को सुनाई, जो अपनी अक्षय कीर्ति के लिए देवताओं में भी पूजनीय थे।
कपिला (गौ): वह दिव्य गाय जिसका उल्लेख महाभारत के दान धर्म और शांति पर्व में पवित्रता के प्रतीक के रूप में आता है।
सुरभि: समस्त गौवंश की माता, जिनका संवाद इन्द्र के साथ महाभारत के वन पर्व में करुणा के महत्व को दर्शाता है।
हंस ऋषि (ज्ञान अवतार): जिन्होंने साध्य देवताओं को तत्वज्ञान का उपदेश दिया था।
अत्रि ऋषि: सप्तऋषियों में से एक, जिन्होंने युद्ध के दौरान द्रोणाचार्य को शस्त्र त्यागने और आध्यात्मिक मार्ग पर जाने की प्रेरणा दी।
कश्यप (मुनि): जिन्होंने परशुराम से पृथ्वी दान में ली थी ताकि वे शस्त्रों का त्याग कर सकें।
अरुंधति: ऋषि वशिष्ठ की पत्नी, जिनका उल्लेख महाभारत के भीष्म पर्व में अपशकुनों और खगोलीय घटनाओं के दौरान आता है।
लोपामुद्रा: ऋषि अगस्त्य की पत्नी, जिन्होंने विदर्भ की राजकुमारी होकर भी ऋषि के कठिन तपस्वी जीवन को अपनाया।
अगस्त्य ऋषि: जिन्होंने विन्ध्याचल पर्वत का गर्व चूर किया और समुद्र का जल पी लिया था; उनकी कथा लोमश ऋषि ने सुनाई।
वातापि: एक असुर जो भोजन बनकर ऋषियों के पेट में घुस जाता था; ऋषि अगस्त्य ने उसे पचाकर उसका अंत किया।
इल्वल: वातापि का भाई, जिसने ब्राह्मणों को सताने का षड्यंत्र रचा था।
नहुष (सर्प रूप): वह राजा जो शाप के कारण अजगर बन गया था और जिसने भीम को पकड़ लिया था; युधिष्ठिर के ज्ञान से उसे मुक्ति मिली।
कार्तिकेय (स्कन्द): शिवपुत्र और देवसेनापति, जिनका विस्तृत जन्म वृत्तांत और तारकासुर वध की कथा मार्कण्डेय ऋषि ने सुनाई।
तारकासुर: वह महाबली असुर जिसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए कार्तिकेय का जन्म हुआ।
बाणासुर (दानव): प्रह्लाद का वंशज और बलि का पुत्र, जिसका उल्लेख कृष्ण के युद्ध प्रसंगों में आता है।
मुर दैत्य: वह असुर जिसका वध करने के कारण श्रीकृष्ण को 'मुरारि' कहा जाता है।
नरकासुर (भौमासुर): प्राग्ज्योतिषपुर का असुर राजा, जिसका वध श्रीकृष्ण और सत्यभामा ने किया था।
हयग्रीव (असुर): जिसने वेदों की चोरी की थी और भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर उसे मारा था।
मधु-कैठभ: वे असुर जो विष्णु के कान के मैल से उत्पन्न हुए थे और जिनका उल्लेख सृष्टि की उत्पत्ति की कथा में है।
अनुविन्द (कौरव): धृतराष्ट्र का पुत्र (अवंती के अनुविन्द से भिन्न); जिसने युद्ध के अंतिम चरणों में दुर्योधन की रक्षा हेतु प्राण दिए।
अश्वबाहु (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो घुड़सवारी और रथ युद्ध की कला में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त था।
बृहत्क्षत्र (कौरव): कौरवों का एक भाई; जिसने पांडव सेना की कुन्तीभोज टुकड़ी के विरुद्ध युद्ध किया।
चित्राक्षर (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो बाणों के माध्यम से युद्ध के संकेत (Signals) देने में निपुण था।
दृढ़प्रमाथी (चतुर्थ): कौरव पक्ष का योद्धा भाई; जिसे भीम ने युद्ध के पंद्रहवें दिन मार गिराया।
कुण्डशायी (पंचम): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने गदा युद्ध में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया।
विरजा (पंचम): कौरव भाई; जो दुर्योधन की अत्यंत निकटवर्ती सुरक्षा पंक्ति का हिस्सा था।
सुवर्चा (पंचम): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध सहदेव ने अपने तीक्ष्ण बाणों से किया था।
दृढ़क्षत्र (पंचम): कौरव भाई; जिसने अपनी वीरता से द्रोणाचार्य के व्यूह की रक्षा की।
सोमकीर्ति (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो कुरु वंश की मर्यादा का पालन करने वाला योद्धा माना जाता था।
अनूदर (चतुर्थ): कौरवों का एक भाई; जिसे भीमसेन ने गदा युद्ध के दौरान वीरगति प्रदान की।
दृढ़ायु (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध के अठारहवें दिन तक अपनी निष्ठा निभाई।
दृढ़वर्मा (पंचम): कौरव योद्धा; जिसने अपनी तलवारबाजी से धृष्टद्युम्न को चुनौती दी थी।
चित्रांग (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका नाम उसके अलंकृत रथ के कारण पड़ा था।
चित्रकुण्डल (चतुर्थ): कौरव भाई; जो युद्धभूमि में अपनी आभा के लिए प्रसिद्ध था।
भीमवेग (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी तीव्र आक्रमण शैली के लिए जाना जाता था।
भीमबल (चतुर्थ): कौरव योद्धा; जिसे भीम ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए मारा।
बलवर्धन (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध में रसद और सैन्य व्यवस्था में योगदान दिया।
उग्रायुध (पंचम): कौरव भाई; जो अपनी प्रचंड युद्ध शैली के लिए विख्यात था।
सत्यसंध (षष्ठ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने मरते दम तक असत्य का सहारा नहीं लिया।
सदासुवाक (पंचम): कौरव पक्ष का योद्धा; जो कुरु सभा में अपनी बात दृढ़ता से रखने के लिए जाना जाता था।
उग्रशायी (पंचम): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो शत्रु सेना पर बिजली की तरह गिरने में माहिर था।
पण्डितक (द्वितीय): कौरव भाई; जो युद्ध और शांति दोनों की नीतियों में पारंगत था।
विशालाक्ष (तृतीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध व्यूहों के निरीक्षण में माहिर था।
साहस्र (द्वितीय): कौरव योद्धा; जो अपनी अदम्य साहसपूर्ण वीरता के लिए प्रसिद्ध था।
अमिौज (द्वितीय): पांडव सेना का एक पराक्रमी योद्धा; जिसने द्रोणाचार्य को आगे बढ़ने से रोका था।
श्रुतायुध (पुत्र): श्रुतायुध का पुत्र; जिसने अपने पिता की मृत्यु के बाद प्रतिशोध स्वरूप अर्जुन पर हमला किया।
महारथ (द्वितीय): एक क्षेत्रीय राजा जिसने युद्ध में अपनी विशेष सैन्य टुकड़ी के साथ भाग लिया।
क्षेत्रधर्मा (द्वितीय): धृष्टद्युम्न का एक और संबंधी जो पांचाल सेना का हिस्सा था।
मदिराश्व (पुरातन): कुरु वंश के एक प्राचीन राजा जिनका उल्लेख वंशावली की महानता बताने में आता है।
कण्व (द्वितीय): एक ऋषि जिनका उल्लेख महाभारत के शांति पर्व में अध्यात्म चर्चा के दौरान आता है।
हारीत ऋषि: एक प्राचीन आचार्य जिन्होंने आयुर्वेद और सदाचार के नियमों का संकलन किया।
सुनीथ (मगध): मगध का एक योद्धा जिसने जरासंध के बाद भी अपनी निष्ठा कौरवों के प्रति रखी।
जसन्ध (द्वितीय): कौरव पक्ष का योद्धा; जिसने सात्यकि के रथ के सारथी को घायल किया था।
अचलोपम (द्वितीय): कौरव भाई; जो युद्ध की विभीषिका के बीच भी विचलित नहीं हुआ।
क्रोधन (द्वितीय): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसका वध भीम ने युद्ध के चौदहवें दिन के रात्रि युद्ध में किया।
उग्रायु (द्वितीय): कौरव सेना का एक योद्धा; जिसने पांचालों की सेना को पीछे धकेला था।
कवची (पंचम): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो एक दिव्य और अभेद्य कवच पहनने के लिए प्रसिद्ध था।
निशंगी (पंचम): कौरव भाई; जो बाणों की गति और मारक क्षमता में निपुण था।
पाशी (षष्ठ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जिसने युद्ध में पाश अस्त्र का सफल प्रयोग किया।
दण्डधार (पंचम): मगध का योद्धा जिसने अपनी चतुरंगिणी सेना के साथ अर्जुन का रास्ता रोका।
धनुर्ग्रह (चतुर्थ): कौरव योद्धा; जिसने अपनी धनुर्विद्या से अभिमन्यु को प्रभावित किया था।
अलोलुप (चतुर्थ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो युद्ध के अंतिम क्षण तक दुर्योधन के साथ खड़ा रहा।
सत्यसंध (सप्तम): कौरव भाई; जिसे कुरु वंश के नैतिक मूल्यों का रक्षक माना जाता था।
सदासुवाक (षष्ठ): धृतराष्ट्र का पुत्र; जो अपनी बुद्धिमत्ता के लिए कौरव सेना में सम्मानित था।
उग्रशायी (षष्ठ): कौरव योद्धा; जिसने पांडव सेना के शिविर रक्षकों पर हमला किया।
अग्निभेष्य (ऋषि): भरद्वाज ऋषि के शिष्य; जिन्होंने द्रोणाचार्य को आग्नेयास्त्र प्रदान किया था।
पाराशर (व्यास पिता): (विशिष्ट संदर्भ) जिन्होंने सत्यवती के साथ मिलकर व्यास जी को जन्म दिया और वेदों का ज्ञान दिया।
च्यवन ऋषि (द्वितीय): भृगुवंशी ऋषि; जिनका उल्लेख अश्विनी कुमारों को सोमपान कराने के प्रसंग में आता है।
सुक्रन (राजा): एक राजा जिसे सहदेव ने अपने दक्षिण विजय अभियान के दौरान पराजित किया था।
बृहद्बल: कोसल नरेश जो कौरव सेना के महारथी थे और अभिमन्यु के हाथों वीरगति को प्राप्त हुए।
महारथ (अंग): कर्ण के अधीन अंग देश का एक सेनापति जिसने अर्जुन को रोकने के लिए अपने प्राण दिए।
क्षेत्रधर्मा (धृष्टद्युम्न पुत्र): धृष्टद्युम्न का प्रतापी पुत्र जो अपने पिता के साथ पांडव सेना का नेतृत्व कर रहा था।
सुनीथ: एक राजा जिसे सहदेव ने दिग्विजय के समय हराया था और जो बाद में पांडव पक्ष से युद्ध में लड़ा।
वृक (पांचाल): पांचाल देश का वह वीर राजकुमार जो द्रोणाचार्य के वध के बाद भी युद्धभूमि में डटा रहा।
सत्यधृति (कौरव पक्ष): एक धनुर्धर जो द्रोणाचार्य का परम मित्र था और उनकी मृत्यु तक उनके साथ खड़ा रहा।
अश्वबाहु (अंतिम): धृतराष्ट्र का वह पुत्र जिसे भीम ने युद्ध के 18वें दिन गदा युद्ध में पराजित किया।
चित्राक्षर (अंतिम): कौरवों का वह भाई जिसका उल्लेख दुर्योधन के अंतिम समय के रक्षकों में आता है।
दृढ़प्रमाथी (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जिसने अपनी वीरता से अंतिम समय तक पांडव सेना को छकाया।
कुण्डशायी (अंतिम): कौरव पक्ष का योद्धा जिसे भीम ने अपनी प्रतिज्ञा के तहत मार गिराया।
विरजा (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जो युद्ध के अंत तक अपने भाइयों की रक्षा के लिए लड़ता रहा।
सुवर्चा (अंतिम): कौरव भाई जिसका वध नकुल ने अपनी तलवारबाजी के कौशल से किया था।
दृढ़क्षत्र (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जिसने द्रोणाचार्य के वध के बाद अश्वत्थामा का साथ दिया।
सोमकीर्ति (अंतिम): कौरव सेना का वह भाई जो अपनी शांत चित्त युद्ध नीति के लिए प्रसिद्ध था।
अनूदर (अंतिम): धृतराष्ट्र का वह पुत्र जो भीमसेन के हाथों 18वें दिन वीरगति को प्राप्त हुआ।
दृढ़ायु (अंतिम): कौरव भाइयों में से एक जिसने पांडवों के विरुद्ध अंतिम सांस तक युद्ध किया।
दृढ़वर्मा (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जिसने अश्वत्थामा के साथ रात्रि हमले में पांडव शिविर की घेराबंदी की थी।
चित्रांग (अंतिम): कौरव पक्ष का योद्धा जिसे भीम ने अपनी गदा से धराशायी किया।
चित्रकुण्डल (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जिसका नाम उसके कान के दिव्य अलंकारों के कारण प्रसिद्ध था।
भीमवेग (अंतिम): कौरवों का भाई जो अपनी शारीरिक शक्ति के लिए भीम के समान ही माना जाता था।
भीमबल (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जिसका वध भीम ने अपनी 100 भाइयों को मारने की प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए किया।
बलवर्धन (अंतिम): कौरव भाई जिसने युद्ध के अंतिम दिन तक कौरव सेना का रसद मार्ग सुरक्षित रखा था।
उग्रायुध (अंतिम): धृतराष्ट्र का पुत्र जो अपनी क्रूर युद्ध शैली के लिए विख्यात था।
सत्यसंध (अंतिम): कौरवों का 100वाँ भाई (क्रम के अनुसार) जिसने युद्धभूमि में कभी पीठ नहीं दिखाई।
शारद्वत (कृपाचार्य): कृपाचार्य का ही एक नाम (शरद्वान के पुत्र होने के कारण), जो युद्ध के बाद अश्वत्थामा के साथ बचे रहे।
गौतमी: कृपाचार्य की बहन और द्रोणाचार्य की पत्नी (कृपी); जिनका विलाप महाभारत के स्त्री पर्व में वर्णित है।
अश्वत्थामा (चिरंजीवी): द्रोण का पुत्र जिसे युद्ध के बाद श्रीकृष्ण ने 3000 वर्षों तक भटकने का शाप दिया था।
परीक्षित: अभिमन्यु और उत्तरा का पुत्र; जो अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से मारा गया था परंतु कृष्ण ने उसे पुनर्जीवित किया।
जनमेजय: परीक्षित का पुत्र जिसने अपने पिता की तक्षक नाग द्वारा मृत्यु का बदला लेने के लिए 'सर्प सत्र' यज्ञ किया था।
उत्तंक: एक महान ऋषि जिन्होंने जनमेजय को सर्प यज्ञ करने के लिए प्रेरित किया था।
आस्तीक: वह ऋषि जिन्होंने जनमेजय के सर्प यज्ञ को रुकवाकर नागों की रक्षा की थी।
जरत्कारु (ऋषि): आस्तीक के पिता और एक महान तपस्वी जिन्होंने नागराज वासुकि की बहन से विवाह किया था।
जरत्कारु (नाग कन्या): वासुकि की बहन और ऋषि जरत्कारु की पत्नी; जिन्होंने आस्तीक को जन्म दिया।
वासुकि: नागराज जिन्होंने देवताओं और असुरों के समुद्र मंथन के दौरान 'नेति' (रस्सी) का कार्य किया था।
तक्षक: वह नाग जिसने राजा परीक्षित को डसा था और जो जनमेजय के यज्ञ का मुख्य लक्ष्य था।
अश्वसेन: तक्षक का पुत्र जो खाण्डव वन के दहन के समय बच निकला था और युद्ध में अर्जुन का शत्रु बना।
कद्रू: दक्ष प्रजापति की पुत्री और नागों की माता; जिनकी विनता के साथ प्रतिस्पर्धा की कथा महाभारत में है।
विनता: गरुड़ और अरुण की माता; जिन्होंने अपनी दासी कद्रू के साथ शर्त हारी थी।
गरुड़: भगवान विष्णु का वाहन; जिन्होंने अपनी माता विनता की मुक्ति के लिए स्वर्ग से अमृत चुराया था।
अरुण: सूर्य देव के सारथी और गरुड़ के भाई; जो अपनी शारीरिक विकृति के बावजूद महान तेजस्वी थे।
सौति (उग्रश्रवा): वह पौराणिक कथावाचक जिन्होंने नैमिषारण्य में ऋषियों को महाभारत की कथा सुनाई।
लोमहर्षण: सूत जाति के ऋषि और सौति के पिता; जो पुराणों और इतिहास के महान ज्ञाता थे।
शौनक ऋषि (अंतिम): नैमिषारण्य के ऋषियों के कुल के प्रमुख जिन्होंने सौति से पूरी महाभारत सुनी।
वैशम्पायन: व्यास के प्रमुख शिष्य जिन्होंने जनमेजय के यज्ञ के समय सबसे पहले महाभारत का पाठ किया।
संजय (अंतिम): धृतराष्ट्र के सारथी जो धृतराष्ट्र की मृत्यु के बाद हिमालय चले गए थे।
युयुत्सु (जीवित): धृतराष्ट्र का वह पुत्र जिसने पांडवों का साथ दिया और हस्तिनापुर के शासन में युधिष्ठिर की सहायता की।
परीक्षित द्वितीय: अर्जुन का प्रपौत्र और कुरु वंश का वह उत्तराधिकारी जिसके समय से कलियुग का प्रभाव बढ़ा।
धर्मराज (यक्ष): वह यक्ष जिसने युधिष्ठिर की परीक्षा ली थी और अंततः स्वर्ग के द्वार पर कुत्ते के रूप में उनके साथ रहा।
वेदव्यास: महाभारत के रचयिता और कृष्ण द्वैपायन; जिन्होंने इस महागाथा को लिपिबद्ध किया।
श्रीकृष्ण: महाभारत के केंद्रबिंदु और पूर्ण पुरुषोत्तम; जिनके बिना यह महागाथा अधूरी है।
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